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साढ़े तीन करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी नहीं सुधरी योग केन्द्रों की सेहत

भोपाल. इलाज के साथ योग के जरिए लोगों की सेहत बेहतर करने के लिए राजधानी में योग केन्द्रों के नाम पर हुआ प्रयोग फेल हो गया। मामले में करीब साढ़े तीन करोड़ बर्बाद हो गए। इसकी शिकायत निगरानी समिति और ईओडब्लूय को की गई है।
करीब 9 साल पहले 3.6 करोड रुपए में 36 योगा सेंटर बनाने राÓय सरकार को केन्द्र से बजट मिला था। इन 36 सेंटर्स में से महज 6 योगा सेंटर ही बन पाए। बाकी अब तक लंबित हैं। ये सातों योगा केन्द्र सिर्फ कागजों में गैस पीडितों के लिए दर्ज हैं। इनमें से ज्यादातर का उपयोग दूसरे कामों में हो रहा है। भोपाल ग्रुप ऑफ इनफारमेंशन की रचना ढींगरा ने बताया कि इस मामले में शिकायत की गई है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन केन्द्रों का संचालन किसके जिम्मे चल रहा है इस बारे में भी स्पष्ट नहीं बताया जा रहा है। लंबे समय से इनसे जुड़े सवालों के जवाब देने से अधिकारी बच रहे हैं।

विभागों के बीच उलझे रहे

जानकारों के मुताबिक इन्हें संस्कृति विभाग, नगर निगम के हवाले कर दिया। गैस पीडित संगठनों के विरोध के बाद इन्हें गैस राहत विभाग ने संस्कृति और नगर निगम से वापस ले लिया लेकिन अभी भी जिन गैस पीडितों के लिए सेंटर बनाए गए थे उनके बजाए दूसरे लोग उपयोग कर रहे हैं। इनमें सामुदायिक भवन से लेकर समारोह तक चल हैं।

गैस पीडि़त क्षेत्रों में हुआ था निर्माण
श हर में इन केन्द्रों के निर्माण के लिए गैस पीडि़त इलाकों को चुना गया। अधिकांश तो केवल कागजों में रह गए। जो छह बने वह भी लगभग बंद हैं। स्वास्थ्य बेहतर करने की बजाय ये खुद कबाड़ की तरह हैं। इनके निर्माण के पीछे विभागीय स्तर पर कई दिनों खींचतान चली। लेकिन जो बने वहां अभी सामान जमा हो रहा है। कई तो सामुदायिक केन्द्र बन गए। बताया गया गिने चुने योग केन्द्र ही हैं जो ठीक से चल रहे हैं। बाकी सभी की हालत खराब है।

- गैस पीडि़तों के स्वास्थ्य संबंधी जो भी सुविधाएं मुहैया कराई गई उनकी मॉनीटरिंग की जा रही है। मामले में रिपोर्ट तैयार हुई है।
पुणेन्द्रू शुक्ला, सदस्य मॉनीटरिंग कमेटी गैस राहत



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