जब किताबों के लिए होना पड़ा परेशान तो बनाई लाइब्रेरी, जमा हो गईं अस्सी हजार पुस्तकें
भोपाल. स्कूल भले न खुल रहे हों लेकिन बच्चों को किताबों की जरूरत है। कोरोनाकाल के दौरान कई ऐसे परिवार हैं जो परेशान हैं। ऐसे में लोगों तक किताबें मुहैया कराने के लिए वेदआशीष और उनकी टीम ने अनोखा काम किया है। इन्होंने एक चेन सिस्टम तैयार किया जिससे शहर के कई लोग जुड़े हैं। वेदआशीष ने दो साल पहले एक किताब घर के रूप में लाइब्रेरी बनाने की शुरुआत की थी। करीब अस्सी हजार किताबें इसके तहत जमा भी की गई। कोरोना के चलते यह सिलसिला थम गया। नए सिरे अब इसे एक चेन सिस्टम का रूप दे दिया गया। वेदआशीष बताते हैं कि लॉकडाउन खुलने के बाद स्कूल खुल गए।
ग्रुप तैयार किए
बच्चों को किताबों की जरूरत थी ऐसे में हमने कुछ ग्रुप तैयार किए जहां जरूरतमंद व किताबें देने वाला सीधे एक दूसरे से संपर्क कर सके। यह कामयाब भी हुआ। सैकड़ों ऐसे परिवार हैं जिन्हें मदद मिल पाई। जो किताबें आपके लिए काम की नहीं हैं, आप भी इन्हें दे सकते हैं।
शहर में बनाए गए थे पाइंट
पूरे जिले से किताबें जमा कराने नगर निगम का सहयोग लिया। शहर में कई जगह पाइंट बनाए जहां लोग किताबें लें और दे सकें। अब यह सिस्टम फिर शुरू करने की तैयारी है। वेदआशीष ने बताया कि मामले में प्रशासन का भी सहयोग उन्हें मिला था।
मिला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
इन्होंने बताया कि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया है। कई बच्चों को देखा जो किताबों की कमी के कारण बीच में ही स्कूल छोड़ देते हैं। इन्हें देखते हुए यह कदम उठाया। संक्रमण के डर से सोशल मीडिया का सहारा लिया। अब किताब घर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चल रहा है।
बनी और भी लाइब्रेरी
पुरानी किताबों को जमा कर लाइब्रेरी बनाने की दिशा में कुछ लोगों ने भी काम किया है। भोपाल के जफर हसन ने एक अनोखी लाइब्रेरी बनाई जहां बच्चों को किताबों का मालिकाना हक दिया जाता है। यह आइडिया भी कोरोनाकाल से ही निकला।
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