सीपीए बंद करने के निर्णय से कर्मचारी चिंतित, भविष्य के प्रति आशंकित
भोपाल। राज्य सरकार द्वारा राजधानी परियोजना प्रशासन (सीपीए) को बंद करने का निर्णय के बाद से यहां कार्यरत कर्मचारी चिंतित हैं। इनकी चिंता की मुख्य वजह भविष्य को लेकर है, क्योंकि इनके मामले में कोई निर्णय नहीं हुआ है। यहां कार्यरत कर्मचारियों की वेतन विसंगति यथावत है, वहीं दैनिक वेतनभोगी और स्थाईकर्मी भी चिंतित हैं।
सीपीए में करीब एक हजार अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें नियमित कर्मचारियों के साथ स्थाईकर्मी और दैनिक वेतनभोगी भी शामिल हैं। स्थाईकर्मियों की संख्या करीब 750 है। स्थाई कुशल श्रमिकों को अकुशल का वेतन दिया जा रहा है। जबकि कुशल को कुशल श्रमिक का वेतन दिए जाने के स्पष्ट निर्देश हैं। कुशल श्रमिकों का वेतन दिए जाने की मांग ये लगातार कर रहे हैं। ये कर्मचारी यहां नियमितीकरण चाहते हैं। इनकी मांग है कि सीपीए बंद किए जाने के पहले इन्हें नियमित किया जाए। कुशल श्रमिक का वेतन भी मिले। वहीं यहां पदस्थ अन्य कर्मचारियों की भी वेतन विसंगति है। वे भी वेतन विसंगति दूर किए जाने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाए हैं।
कार्ययोजना बने तो होगा मर्जर -
सीपीए में ज्यादतर अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर हैं। इन्हें उनके मूल विभाग में वापस भेजा जाएगा। कर्मचारियों के मामले में तय है कि इन्हेंं अन्य विभागों में मर्जर किया जाएगा, लेकिन अभी इसके लिए कोई कार्ययोजना तैयार नहीं हुई है। मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के प्रांताध्यक्ष अशोक पाण्डेय का कहना है कि सरकार सीपीए को बंद करने के पहले कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति भी चिंता करे। मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच राजधानी परियोजना वन मण्डल की हाल ही में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि सीपीए को बंद करने के पहले यहां कार्यरत स्थाईकर्मियों की वेतन विसंगति दूर की जाए और इन्हें नियमित किया जाए।
काम-काज लगभग तय -
सीपीए के अधीन शहर के आधा दर्जन से अधिक पार्क और शहर की कुछ सड़कें हैं। ऐसे में पार्को का रख रखाव नगर निगम करेगा और सड़कों की जिम्मेदारी अब पीडब्ल्यूडी के पास जाएगी।
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