भगवान गणेश की इस प्रतिमा को चेट्टियार समुदाय मानता है समृद्धि का प्रतीक - Web India Live

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भगवान गणेश की इस प्रतिमा को चेट्टियार समुदाय मानता है समृद्धि का प्रतीक

भोपाल। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के नवीन श्रृंखला सप्ताह का प्रादर्श के अंतर्गत सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह के प्रादर्श के रूप में काष्ठ निर्मित गणेश की प्रतिमा मारा चिरापम गणेश को ऑनलाइन प्रदर्शित किया गया। इसे शिवगंगा, तमिलनाडु के चेट्टियार समुदाय से संकलित किया गया था। यह प्रतिमा 177 सेमी ऊंची औरङ 38 सेमी चौड़ी है। इसे संग्रहालय में 1998 में शिवगंगा, तमिलनाडु के चेट्टियार समुदाय से संकलित किया गया था। इस प्रादर्श को इस सप्ताह दर्शकों के मध्य प्रदर्शित किया गया।

कमलासन पर उनके वाहन मूषक की पीठ पर नृत्य की मुद्रा में दर्शाया गया
इस सम्बन्ध में संग्रहालय के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि मारा सिरपम भगवान गणेश की एक उत्कृष्ट काष्ठ प्रतिमा है, जो तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के चेट्टियार समुदाय से संकलित की गई है। चेट्टियार समृद्ध व्यापारी रहे हैं जो ज्यादातर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ व्यापार करते थे। डॉ. मिश्र का कहना है कि समुदाय के लोगों का अधिकांश धन भव्य इमारतों के निर्माण और उनकी अंदरूनी सजावट में खर्च होता था। चतुर्भुज गणेश की इस सुंदर प्रतिमा को एक ऊंचे कमलासन पर उनके वाहन मूषक की पीठ पर नृत्य की मुद्रा में दर्शाया गया है। प्रतिमा अत्यधिक अलंकरण और समस्त आयुधों से युक्त कर विस्तार से उकेरी गई है। प्रतिमा के ऊपरी भाग को पत्तियों, फूलों और पक्षियों से अलंकृत किया गया है। चेट्टियारों के महलनुमा घर काष्ठ उत्कीर्णन कौशल के उत्कृष्ट केंद्र थे। देवी-देवताओं, वनस्पतियों और जीवों की सूक्ष्मता से उत्कीर्णित लकड़ी की प्रतिमाएं उनकी वास्तुकला के महत्वपूर्ण तत्व हैं।

गुजरात के दल ने किया संग्रहालय का भ्रमण

गुजरात सरकार का जनजातीय विकास विभाग गुरुदेश्वर नर्मदा में स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों की भूमिका पर केन्द्रित नेशनल म्यूजियम ऑफ ट्राइब्लस फ्रीडम फाइटर्स पर अंतरंग एवं मुक्ताकाश संग्रहालय स्थापित कर रहा है। इसे लेकर वहां के अधिकारियों के दल ने मानव संग्रहालय का दौरा किया। संग्रहालय के निदेशक डॉ. पीके मिश्र ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले वे गुमनाम नायक जिनके बारे में लेखकीय सामग्री में जानकारी उपलब्ध नहीं है उसे भी शामिल करते हुए लोक साहित्य को शामिल किया जाएगा। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों पर संग्रहालय निमार्ण का आधार स्तंभ बन सकता है। इन्होंने संग्रहालय निमार्ण व उनके विभागीय संरचना तथा प्रदर्शनी निमार्ण के विषयों पर जानकारी प्राप्त की। उन्हें जनजातीय आवास, रॉक आर्ट, हिमालयन विलेज तथा विथि संकुल का भ्रमण किया।



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