तालाब और जंगल बचाने लिया आरटीआइ-एनजीटी का सहारा, जान के खतरे के बाद भी लगे हैं पर्यावरण बचाने में - Web India Live

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तालाब और जंगल बचाने लिया आरटीआइ-एनजीटी का सहारा, जान के खतरे के बाद भी लगे हैं पर्यावरण बचाने में

भोपाल। राजधानी अपने खूबसूरत तालाबों और जंगल के लिए प्रसिद्ध है लेकिन बिल्डर और अफसर सांठगांठ जहां जंगल में अतिक्रमण कर रहे हैं तो ताबालों को भी प्रदूषित कर रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए शहर के एक बिजनेसमैन राशिद नूर खान ने आरटीआइ को हथियार बनाया। इसके चलते उन्हें कई बार धमकियां मिलीं, जान से मारने की कोशिश भी हुई, लेकिन वे पीछे नहीं हटे। एनजीटी में इनकी ही याचिका के बाद करीब 850 एकड़ जमीन को प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट घोषित किया गया।
राशिद ने बताया कि 2013 में मैंने देखा कि दामखेड़ा इलाके में बिल्डर्स पहाड़ों की अवैध तरीके से खुदाई करा रहे हैं। मैंने माइनिंग विभाग में शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुआ। हम रात में ट्रक को रोककर पुलिस को बुलाते थे क्योंकि माइनिंग विभाग के अफसर फोन तक नहीं उठाते थे। मैंने आरटीआइ से पता लगाया कि यहां कितने क्षेत्र में कितनी खुदाई की अनुमति है। इसके बाद मैंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) में अपील की। 2014 में एनजीटी ने स्टे दिया। हालांकि तब तक पहाड़ों को छलनी किया जा चुका था। एनजीटी ने बिल्डर्स पर जुर्माना जरूर लगाया। मैंने कोर्ट में बताया कि केरवा और कलियासोत के जंगल में बाघ भ्रमण क्षेत्र हैं, यहां लगातार फॉर्महाउस व अन्य कंस्ट्रक्शन हो रहा है। जंगल में सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई हो रही है। आग लगाकर घनत्व कम करने की साजिश की जा रही है। वहीं, बाघ को भी परेशानी हो रही है। मेरी ही याचिका के बाद 6 फरवरी 2020 को दोनों जगह मैपिंग किए जाने के आदेश हुए।

जंगल में जाकर बनाए कटाई के वीडियो
राशिद ने बताया जंगल में अवैध कटाई को लेकर सरकार और अफसर संजीदा नहीं हैं। मैंने कई बार घने जंगल में जाकर अवैध कटाई के वीडियो बनाए। लॉकडाउन में भी यहां डेढ़ से दो हजार पेड़ काट दिए गए। मेरी एक अन्य याचिका पर बैतूल में माचना नदी में हो रहे उत्खनन पर नगर पालिका पर जुर्माना लग चुका है। राशिद ने बताया कि कलियासोत डैम में मड रैली का आयोजन होता था। इसमें डीजल इंजन वाली गाडिय़ों चलाई जाती थी। इसे देखने सैकड़ों लोग आते थे, वे भी यहां प्रदूषण फैलाते थे। इससे घडिय़ाल के अंडे कुचल जाते थे। मैंने कलेक्टर से शिकायत कर रैली कैंसिंल कराई। दिल्ली में एनजीटी को लेटर लिखा था। मेरी पीटिशन के बाद इस पर रोक लगी।

रामसर साइट में हो रहा अवैध निर्माण रुकवाया
राशिद ने बताया कि बड़ा तालाब और छोटा तालाब राइसर साइट में आती है। नगर निगम छोटे तालाब, सूरज नगर सहित तीन स्थानों पर एसटीपी का निर्माण करा रहा था। मैंने आरटीआइ दायर की, फिर एनटीजी में इस मामले को ले गया। एनटीजी ने एसटीपी पर रोक लगाई क्योंकि रामसर साइट होने के कारण 50 मीटर के अंदर किसी तरह का निर्माण नहीं हो सकता था। बैरागढ़ में गुलाब उद्यान के पास निगम ने पांच हजार डंपर मिट्टी खुदाई करा दी, यह इलाका दलदली है। इसकी बिना टेक्निकल स्टडी के खुदाई की गई। इससे बड़े तालाब का पर्यावणीय तंत्र खराब हुआ। इसे लेकर भी मैंने एनजीटी में शिकायत की है।



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