Ganesh Chaturthi 2021: इस दिन भूलकर भी न करें चंद्र दर्शन, नहीं तो लगेगा ये पाप
Ganesh Chaturthi : श्री गणेश जी को हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य देव माना जाता है। वहीं यह आदिपंच देवों में भी एक प्रमुख देव माने जाते हैं। मान्यता के अनुसार भक्तों की बाधा, सकंट, रोग-दोष और दरिद्रता को दूर करने वाले भगवान गणेश रिद्धि-सिद्धि के दाता और शुभ-लाभ के प्रदाता भी हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इस दिन चंद्र दर्शन को वर्जित माना गया है, मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्र दर्शन करने वाले को कलंकित लगता है।
ऐसे में इस बार यानि साल 2021 में प्रथम पूज्य श्रीगणेश का प्रमुख पर्व गणेश चतुर्थी शुक्रवार के दिन सितंबर 10,2021 को भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि में मनाया जाएगा। इसका कारण यह है कि श्री गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में, सोमवार के दिन स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में माना जाता था।
पौराणिक ग्रंथों में ‘ॐ’ को साक्षात श्री गणेश का स्वरुप माना गया है। जिस प्रकार प्रत्येक मंगल कार्य से पहले गणेश-पूजन होता है, उसी प्रकार प्रत्येक मन्त्र से पहले ‘ॐ’ लगाने से उस मंत्र का असर कई गुना बढ़ जाता है।
श्री गणेश जी के बारह प्रसिद्ध नाम:
1. सुमुख, 2. एकदंत, 3. कपिल, 4. गजकर्ण, 5. लम्बोदर, 6. विकट, 7. विघ्नविनाशन, 8. विनायक, 9. धूम्रकेतु, 10. गणाध्यक्ष, 11. भालचंद्र, 12. गजानन।
गणेश चतुर्थी मुहूर्त 2021...
इस साल 2021 में चतुर्थी तिथि गुरुवार,सितंबर 09, 2021 को रात के 12:18 से प्रारंभ होकर शुक्रवार के दिन सितंबर 10,2021 की रात 09:57 बजे तक रहेगी। वहीं गणेश पूजा मुहूर्त- 11:03 AM से 01:32 PM बजे तक रहेगा।
अतिविशिष्ट मुहूर्त-
12.21 PM से 12.45 PM तक (अभिजित+मध्याह्नकाल+शुभ चौघड़िया)
चन्द्र दर्शन वर्जित समय : 09:12 AM से 08:53 PM
चंद्र दर्शन: इस दिन ना देखें चंद्रमा को
हिंदू धर्म ग्रंथों में इस दिन यानि चतुर्थी तिथि को चंद्रमा के दर्शन वर्जित माना गया है। माना जाता है कि यदि कोई गलती से ही सही यदि चंद्र दर्शन कर लेता है, तो उसे झूठा कलंक का सामना करना पड़ता है।
इसी चंद्र दर्शन से जुड़ी एक कथा श्रीकृष्ण की भी है, जिसके कारण उन पर यानि श्रीकृष्ण पर स्यमंतक मणि चुराने का कलंक लगा था। वहीं यह भी माना जाता है कि यदि आपने गलती से चंद्र को देख ही लिया तो कृष्ण-स्यमंतक कथा को पढ़ने या इसे विद्वान जनों से सुनने पर गणेश जी क्षमा भी कर देते हैं।
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चंद्र दर्शन से जुड़ी श्री कृष्ण की कथा...
दरअसल श्री कृष्ण की इस कथा के अनुसार जब श्रीकृष्ण पर स्यमंतक मणि चुराने का झूठा आरोप लगा और श्रीकृष्ण जब इस अकारण मिले अपमान के शोक में डूबे थे कि उसी समय वहां नारदजी आ पहुंचे। उन्होंने ही श्रीकृष्ण को बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन आपके द्वारा कर लिए जाने के कारण ही आपको इस तरह लांछित होना पड़ा है।
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इस पर श्रीकृष्ण ने पूछा- ऐसा क्या कारण है जिसके चलते चौथ के चंद्रमा के दर्शनमात्र से मनुष्य कलंकित होता है? इस पर नारदजी ने बताया कि एक बार ब्रह्माजी ने चतुर्थी पर गणेशजी का व्रत किया था। यह देख गणेशजी ने प्रकट होकर उनसे वर मांगने को कहा तो ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना करने का मोह न होने का वरदान मांगा।
इस पर गणेशजी जैसे ही 'तथास्तु' कहकर चलने लगे, उनके विचित्र व्यक्तित्व को देखकर चंद्रमा ने उनका उपहास कर किया। इससे रुष्ट होकर गणेशजी ने चंद्रमा को शाप दिया कि तुम्हारा मुख आज से कोई नहीं देखना चाहेगा।
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इतना कहकर गणेशजी अपने लोक चले गए और चंद्रमा भी मानसरोवर की कुमुदिनियों में जाकर छिपा गया। ऐसी स्थिति में प्राणियों को चंद्रमा के बिना काफी कष्ट होने लगा। यह देखकर ब्रह्माजी के आदेश पर श्री गणेश का सभी देवताओं के व्रत किया, व्रत से प्रसन्न होकर गणेशजी बोले कि चंद्रमा अब शाप मुक्त तो हो जाएगा,
लेकिन जो भी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा के दर्शन करेगा, उसे चोरी आदि का झूठा लांछन जरूर लगेगा। किंतु जो मनुष्य प्रत्येक द्वितीया को चंद्र के दर्शन करता रहेगा, वह इस लांछन से बच जाएगा। वहीं इस चतुर्थी को सिद्धिविनायक व्रत करने से सारे दोष छूट जाएंगे।
देवता यह सब सुनने के पश्चात अपने-अपने स्थानों को प्रस्थान कर गए। कथा सुनाने के पश्चात नारद ने श्री कृष्ण से कहा कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन करने से आपको भी यह कलंक लगा है। यह सब नारद द्वारा बताए जाने के बाद श्रीकृष्ण ने भी इसी व्रत की मदद से कलंक से मुक्ति पाई।
चन्द्र दर्शन दोष निवारण मंत्र:
सिंहःप्रसेनमवधीत् , सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः।।
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