सूखे नशे और पार्टी ड्रग्स की चपेट में आ रहे हैं बच्चें, 45% लोग गांजा, चरस, स्मैक और खतरनाक एमडी ड्रग्स के शिकार
भोपाल। युवाओं में धीरे-धीरे सूखे या गंभीर नशों की लत बढ़ती जा रही है। शहर के नशामुक्ति केन्द्रों में जितने व्यक्ति नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए उपचार कर रहे हैं, उनमें से लगभग आधे सूखे यानि ड्रग्स, गांजा, स्मैक, चरस व खतरनाक एमडी ड्रग के के शिकार है। सबसे नई समस्या पार्टी इग्स के रूप में सामने आ रही है। पांच साल पहले इनकी संख्या नाममात्र थी, अब बढ़कर 5 फीसदी हो गई है।
केस-1
शाहपुरा इलाके में रहने वाले एक युवक के माता-पिता सरकारी नौकरी में हैं। उन्होंने बेटे को कभी कोई कमी नहीं होने दी। किशोर उम्र में उसने दोस्तों के साथ एंजॉय के लिए शराब पीना शुरू की। धीरे-धीरे दिन और मात्रा बढ़ती गई, आखिर में शराब मजा आना बंद हो गया तो दूसरे नशों की ओर बढ़ गया। कुछ ही महीनों में इसकी चपेट में आ गया। माता-पिता ने दो बार बार नशा मुक्ति केन्द्र में भेजा लेकिन हर बार नशा उसे पकड़ लेता। आखिरी बार युवा और परिवार ने मिलकर हिम्मत दिखाई और नशा मुक्ति केन्द्र में लम्बे इलाज के बाद वह ड्रग्स के चंगुल से बाहर निकल सका।
केस-2
अरेरा कॉलोनी निवासी एक बिजनेस मैन परिवार में पति-पत्नी घर पर पार्टी करते हुए दोस्तों के साथ ड्रिंक्स शेयर करते थे। माता पिता को एल्कोहल लेते देख किशोर होती बेटी ने नशे को सामान्य माना और दोस्तों के साथ में ड्रिंक्स लेने लगी। बाद में गलत संगत के बीच वह ड्रग्स की चपेट में आ गई। लगातार पार्टियों, देर रात तक बाहर रहने का माता पिता को पता चला। उन्होंने सख्ती कर बेटी को घर में रोकने की कोशिश की लेकिन तब तक हालात इतने खराब हो चुके थे, किशोरी दोस्तों के साथ घर से भाग जाती। तीन बार घर से भागने और नहीं संभलने पर उसे नशामुक्ति केन्द्र भेजा।
अगर ये संकेत दिखें तो हो जाएं सचेत....
- किशोर या युवा परिवार के सदस्यों से कटा-कटा रहने लगा हो। कई घंटों तक कमरे में बंद रहता है, दिन में बहुत देर से सोकर उठता है।
- आंखों में हमेशा लाली छाई रहती है। कई बार आंखों में कालापन तक आने लगता है, बोलचाल में परिवर्तन दिख रहा है, या बिल्कुल शांत हो गया है।
- यदि किशोर या युवा के पास या कमरे से कुछ जलने की बदबू आती हो।
-हाथ में सीरिंज लगने जैसे निशान दिख रहे हैं, छुपाने के लिए फुल स्लीव्स की शर्ट पहन रहा है।
-बीमार पड़ने पर भी परिजनों के साथ डॉक्टर के पास जाने को राजी नहीं होता, दोस्तों के साथ ही जाने की जिद करता है। उसके कमरे या बाथरूम में इंजेक्शन या सीरिंज दिखने पर सतर्क हो जाएं।
इस बारे में समर्थ दंडौतिया, श्रीजी नशा मुक्ति केन्द्र, बावड़िया कला का कहना है कि पांच साल पहले अधिकांश केस शराब छुड़ाने के आते थे। तब गांजा, चरस या स्मैक के एडिक्ट कम थे। अब युवाओं में इन नशों के लत वाले 45 से 50 फीसदी तक हैं।
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