उप चुनाव में हार के साइड इफेक्ट : खण्डवा, बुरहानपुर के संगठन पर गिरेगी गाज, पदाधिकारियों की होगी छुट्टी
भोपाल। हाल ही में हुए उप चुनाव की हार से कांग्रेस अभी तक उभर नहीं पाई है। इसको लेकर पार्टी में लगातार मंथन का दौर चल रहा है। पार्टी का सबसे ज्यादा फोकस खण्डवा लोकसभा सीट पर था। शायद इसीलिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी यहां सबसे ज्यादा चुनावी सभाएं की थीं, लेकिन यहीं पार्टी को सबसे ज्यादा क्षति हुई। ऐसे में इस लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले जिलों में खण्डवा और बुरहानपुर संगठन पर एक्शन तय है। यहां का पूरा संगठन भंग करने की तैयारी है। पदाधिकारियों की भी छुट्टी होगी। जिससे निकाय चुनाव और फिर आम चुनाव में पार्टी को दोबारा ऐसा झटका न लगे।
खण्डवा लोकसभा के लिए पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के चुनाव लडऩे की तैयारी थी। इसके लिए वे लम्बे समय से सक्रिय भी थे। क्षेत्र में संगठन के पदाधिकारियों की नियुक्ति इन्हीं की सिफारिश पर पार्टी ने की। यहां तक ब्लॉक, तहसील और बूथ स्तर पर जमावट भी अरुण यादव ने की थी। लेकिन घटनाक्रम ऐसा बदला कि अरुण यादव ने चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया, और राजनारायण पुरनी को यहां से टिकट दे दिया गया। एन मौके पर उम्मीदवार बदलना पार्टी के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह साबित हुआ। पार्टी की आंतरिक रिपोर्ट के मुताबिक उप चुनाव की तिथि आते-आते यहां का संगठन शिथिल हो गया। पदाधिकारियों ने पूरी ताकत से काम नहीं किया, जिस ताकत से वे पहले काम कर रहे थे।
गुटबाजी से भी हुआ नुकसान -
खण्डवा लोकसभा सीट से अरुण यादव दावेदार थे। वहीं निर्दलीय विधायक शेरा सुरेन्द्र सिंह शेरा भी अपनी पत्नी के लिए टिकट चाह रहे थे। लेकिन पुरनी को टिकट मिलने से यादव और शेरा ने उन्हें पूरा समर्थन की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव प्रचार से लेकर सभाओं में वे साथ रहे, लेकिन उनके लोगों की सक्रियता ज्यादा नहीं रही। इसका भी पार्टी को खामियाजा भुगतना पड़ा। क्षेत्र में गुटबाजी भी भारी पड़ी। जोबट और पृथ्वीपुर विधानसभा उप चुनाव में हार की रिपोर्ट पर भी पार्टी में मंथन चल रहा है।
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