5 से 17 साल की 80 नृत्यांगनाओं ने दशावतार और हनुमान चालीसा से किया हनुमान-विष्णु लीलाओं का वर्णन
भोपाल। प्रतिभालय आर्टस् अकादमी की ओर से रवीन्द्र भवन में संस्कार बालोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें 5 से 17 साल की 80 नृत्यांगनाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में परंपरागत शास्त्रीय रचनाओं के साथ दशावतार से भगवान विष्णु के 10 रूपों का वर्णन किया गया है। साथ ही हनुमान चालीसा पर नृत्य प्रस्तुति मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। प्रस्तुति की शुरुआत या देवी सर्व भूतेषू... प्रस्तुति से हुई। दुर्गा सप्तशती पर आधारित प्रस्तुति राग - नाट्टै, ताल आदि में निबद्ध रही। इसके बाद जतिस्वरम की प्रस्तुति हुई। यह शुद्ध नृत्य का रूप है जिसमें नृत्य की प्रधानता होती है। इसमें जतियां और कोरवाई लयबद्ध होते हैं जिन्हें स्वरों के द्वारा एक राग और ताल में निबद्ध किया जाता है। इसमें कोई साहित्य या अभिनय नहीं होता।
पुष्पांजली की प्रस्तुति राग गांभीर नट्टै, ताल आदि में निबद्ध रही
अगली कड़ी में श्लोकों की प्रस्तुति हुई। श्लोकों का जप बच्चों के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह उनकी एकाग्रता, मांसपेशियों, संज्ञानात्मक कौशल और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करने के साथ उन्हें शांत रखता है। वहीं, दशावतार में भगवान विष्णु के दस अवतारों को संदर्भित करता है, जो संरक्षण के देवता हैं।दशावतार शब्द की उत्पत्ति दश से हुई है, जिसका अर्थ है 'दस' और अवतार (अवतार), जिसका अर्थ है 'वंश'। ये अवतार सदियों से मानव विकास को आकार देने में प्रमुख भूमिका निभाते हुए माने गए हैं हैं। वहीं, राग नट्टै, ताल चतुरश्र एकम् में निबद्ध अलारिप्पु प्रस्तुति में देवों का आह्वान किया गया। वहीं, पुष्पांजली की प्रस्तुति राग गांभीर नट्टै, ताल आदि में निबद्ध रही। भरतनाट्यम नत्य प्रस्तुति का आरंभ ईश्वर को पुष्पांजली अर्थात पुष्पों की अंजलि अर्पित कर किया जाता है। अंत में ताल आदि में हनुमान चालीसा की प्रस्तुति हुई।
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