भरत वकस म छट दश क भ भगदर बनए त तयर हग नय मरकट
भोपाल। पहले सत्र में भारतीय परिदृश्य में वैश्विक रूप से सेवा भाव पर विचार रखे गए। देश-विदेश से आए डेलिगेट्स ने कहा कि भारत आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है। अब वह ग्लोबल लीडर के रूप में अपनी भूमिका निभा सकता है। विकास में छोटे देशों को भी भागीदार बनाना होगा। यहां भारतीय कंपनियों के विकास की असीम संभावनाएं हैं।
भारत ने अपने हेरिटेज को सहेजा
इंडोनिशिया की निमया यूसदा ने बताया कि मैं गुजरात यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पीएचडी कर रही हूं। भारत और इंडोनेशिया ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से जुड़े हुए हैं। भारत ने एक ओर अपने हेरिटेज को सहेजा है तो दूसरी ओर हर क्षेत्र में विकास भी किया है। संस्कृति की विकास में बड़ी भागीदारी होती है। इसके जरिए वैश्विक पर्यटन को आकर्षित कर सकते हैं। भारत में रहकर मैंने देखा कि आर्थिक विकास में संस्कृति की भागीदारी को कैसे बढ़ाया जा सकता है। वहीं, दिल्ली की डिकी भूटिया ने बताया कि मैं गुडगांव के पास रिजोर्ट संचालित करती हूं। वहां गोल्फ कोर्स भी है। मैं सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर काम कर रही हूं। हमारी कोशिश है कि प्लास्टिक का प्रयोग कम से कम हो। हमने विकल्पों को अपनाया तो हमारी सर्विस को ग्राहकों ने भी पसंद किया। ग्राहकों के लिए जुट बैग तैयार किए। प्लास्टिक वेस्ट से बैच, टॉयलेट और बि्रक्स तैयार की।
भारत की कंपनियां नवाचार कर रहीं
नाइजीरिया के एकेच प्रीसियस ने बताया कि मैं आइआइटी इंदौर से इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रहा हूं। मेरा विषय ब्रेन कम्प्युटर इंटरफेस है। भारत की कंपनियां नवाचार कर रही हैं, लेकिन सभी का मकसद अमेरिया और यूरोपिय देशों में ही उत्पाद को बेचने पर होता है, जबकि अफ्रीका से लेकर अन्य देशों में भी भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार खुला है। वहां प्रतिस्पर्धा भी कम है। यदि कंपनियां उन पर ध्यान ध्यान दे तो भारत छोटे देशों की मदद करने के साथ ही अपनी कमाई भी बड़ा सकता है।
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