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जानिए क्या है पीएम ई-बस सेवा योजना, इन शहरों में चलेंगी 552 इलेक्ट्रिक बसें

pm e bus seva scheme-राज्य में अब इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी। सरकार ने मंगलवार को छह शहरों में 552 ई-बसों को चलाने की मंजूरी दी। राज्य मंत्रालय में सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रस्तावों पर मुहर लगी। साथ ही प्रदेश के पर्यटन शहरों को हवाई मार्ग से जोडऩे के लिए निजी सेक्टर के साथ पीपीपी मॉडल पर हवाई सेवा मुहैया कराने को भी मंजूरी दी गई। शहरों में सिटी बस सेवा बढ़ाने और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन कम करने पीएम ई-बस सेवा के तहत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर में 552 शहरी ई-बसें दौड़ेंगी। इसके लिए पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म से काम होगा। राज्यस्तरीय मानीटरिंग, संचालन व चार्जिंग स्टेशन पर काम किए जाएंगे।

 

 


कुछ ऐसा होगा सेटअप

  • इंदौर को 150, भोपाल को 100, ग्वालियर को 70, जबलपुर को 100, उज्जैन को 100 और सागर को 32 ई-बसें मिलेंगी
  • ई-बस के प्रस्ताव का टेंडर केंद्र के स्तर पर होगा। बस डिपो के लिए 10 करोड़ रुपए हर शहरों को देंगे
  • बसों का संचालन नगर निगम से, ऑपरेटर के होंगे ड्राइवर-कंडक्टर
  • यात्री किराया व विज्ञापन से आने वाला राजस्व संबंधित निगम को
  • बस संचालन में 22 रुपए प्रति किमी पर अनुदान राशि 12 साल तक केंद्र देगा
  • ई-बस संचालन के लिए सीएस की अध्यक्षता में कमेटी, इसमें एसीएस वित्त व ऊर्जा-परिवहन पीएस, नगरीय प्रशासन के पीएस व सचिव रहेंगे

 

 

पर्यटन शहरों तक हवाई कनेक्टिविटी

पर्यटन शहरों को हवाई सेवा मुहैया कराई जाएगी। निजी सेक्टर की मदद से पीपीपी पर पर्यटन शहरों तक हवाई सेवा मिलेगी। हेलिकॉप्टर के जरिए बड़े शहर पर्यटक शहरों से जुड़ेंगे। इसमें महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, ओरछा, मैहर हो सकते हैं। ये होगा फायदा ई-बस के संचालन से ध्वनि और वायु प्रदूषण में कमी होगी। पेट्रोल-डीजल की खपत घटेगी। ई-बस से खर्च में कमी आएगी। सामान्य बसों से सस्ती होगी।

पीएम ई-बस सेवा योजना क्या है?


भारत सरकार ने पीपीपी मॉडल पर 10,000 इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती करके बस संचालन को बढ़ाने के उद्देश्य से 16 अगस्त 2023 को "पीएम-ईबस सेवा योजना" शुरू की है। पीएम-ईबस सेवा के तहत तैनात की जाने वाली ई-बसों को आम लोगों तक पहुंचाना है।

इसकी खास बातें

इस योजना का उद्देश्य सीटी बस सेवा को 10,000 ई-बसों के साथ पीपीपी मॉडल पर बढ़ाना है। इस योजना की आंशिक लागत को लगभग 57,613 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत आएगी। केंद्रीय सहायता के रूप में 20,000 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

यह योजना 10 वर्षों के लिए बस सेवा पर लागू होगी। 2011 की जनगणना के अनुसार तीन लाख और उससे अधिक आबाद वाले शहरों में यह सेवा शुरू होगी।

सभी केंद्र-शासित प्रदेशों, उत्तर पूर्वी क्षेत्र और पहाड़ी राज्यों के सभी राजधानी शहरों में यह शुरू होगी। इस योजना के अंतर्गत, प्राथमिकता उन शहरों को दी जाएगी जिनमें कोई संगठित बस सेवा नहीं है। यह योजना लगभग 10,000 बसों के विनियमन के माध्यम से 45,000 से 55,000 सीधे नौकरियों को उत्पन्न करेगी।



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