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आचार संहिता के पहले आनन-फानन में लोकार्पण और शिलान्यास का सच

भोपाल. लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गयी है। हर चुनाव के पहले ऐसा होता है कि आचार संहिता लागू होने के ठीक पहले आनन-फानन में तमाम विकास कार्यों के भूमिपूजन और शिलान्यास होते हैं। शनिवार को भी यही क्रम दोहराया गया। इसके पहले अक्टूबर २०२३ में भी जब विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई थी तब आचार संहिता लगने के पहले अक्टूबर के पहले सप्ताह में एक दर्जन से अधिक प्रोजेक्ट्स का भूमिपूजन और शिलान्यास हुआ। लेकिन इनमें से आधे से अधिक का जमीनी काम लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद तक शुरू नहीं हो पाया है। नेताओं को इन भूमिपूजन और शिलान्यास की अब याद तक नहीं है। पत्रिका ने राजधानी के ऐसे ही कुछ प्रोजेक्ट का मौका-मुआयना किया तो हकीकत सामने आ गई।

यह है जमीनी हकीकत
1. प्रोजेक्ट- हलालपुर-लाउखेड़ी से सीहोर नाका बैरागढ़ एलीवेटेड कॉरीडोर।
लागत- 234 करोड़
लंबाई- तीन किमी
स्थिति- अक्टूबर 2023 के पहले सप्ताह में भूमिपूजन। लेकिन अभी ठेका कंपनी बोरिंग से जमीन के अंदर गहराई में स्थिति का आंकलन कर रही है।
राहत का इंतजार- प्रोजेक्ट से बैरागढ़ में टै्रफिक जाम की स्थिति घटेगी। इंदौर-सीहोर जाने वाले लालघाटी से बिना ट्रैफिक में फंसे बैरागढ़ पार कर लेंगे।
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2. प्रोजेक्ट- बावडिय़ा सेज अपोलो से नर्मदापुरम रोड आशिमा मॉल।
लागत- 120 करोड़
लंबाई- 1250 मीटर
स्थिति- भूमिपूजन के बाद कोई काम शुरू नहीं हुआ। एजेंसी को पीडब्ल्यूडी लगातार पत्र लिख रहा है, लेकिन वह काम शुरू नहीं कर रही।
राहत का इंतजार- कोलार से नर्मदापुरम रोड का एक नया व सीधा रास्ता। करीब तीन किमी का फेरा बचेगा। नर्मदापुरम रोड के विकास का लाभ बावडिय़ा, गुलमोहर, कोलार तक मिलेगा।
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3. प्रोजेक्ट- बीयू से मिसरोद तक एलीवेटेड लेन।
लागत- 385 करोड़
लंबाई- 5.50 किमी
स्थिति- अभी काम शुरू नहीं। इस साल के आखिर तक शुरू होने की उम्मीद।
राहत का इंतजार- नर्मदापुरम रोड पर आवासीय व व्यवसायिक गतिविधियां कई गुना होने से जाम लगता है। बीयू से मिसरोद के बीच आगे मंडीदीप की ओर का टै्रफिक आसानी से निकल जाएगा।
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अभी भूमिपूजन, काम एक साल बाद
लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले आनन फानन में मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट की पहली लाइन के दूसरे भाग के लिए भूमिपूजन हुआ। इसमें आठ स्टेशन रहेंगे। दो अंडरग्राउंड स्टेशन हैं। एजेंसी तय है, लेकिन बजट नहीं है। इसका जमीनी काम शुरू होने में कम से कम एक साल का समय लगने की बात कही जा रही है।
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किसी भी प्रोजेक्ट के काम को शुरू करने के पहले कई प्रक्रियाएं होती हैं। ठेकेदार तय गाइडलाइन से काम करता है। जिन परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ है उनमें थोड़ी देरी हुई, लेकिन जल्द ही काम शुरू करवा दिया जाएगा।
- संजय खांडे, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी



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