19 साल बाद अनूठा संयोग, पूरे 30 दिन का होगा श्रावण मास, ज्योतिष भी मान रहे हैं कि इस बार सावन का ये महीना अनूठा होगा
दिल्ली। शनिवार से श्रावण मास या सावन का महीना शुरू हो रहा है। बम भोले के जयकारों के साथ भगवान शिव के भक्त उनकी भक्ति में लीन हो रहे हैं। इस बार श्रावण का पहला सोमवार 30 जुलाई को पड़ रहा है। इस बार के श्रावण मास में एक और खास बात है। दरअसल, 19 साल बाद ऐसा हो रहा है जब श्रावण मास पूरे 30 दिन का होगा। ज्योतिष भी मान रहे हैं कि इस बार सावन का ये महीना अनूठा होगा। स्वास्थ्य और शांति के क्षेत्र में उत्तम फल प्राप्त होंगे।
पहला सोमवार और अनूठा योग
- श्रावण का पहला सोमवार 30 जुलाई को पड़ेगा। इस दिन सौभाग्य योग बन रहा है। धनिष्ठा नक्षत्र है और द्विपुष्कर योग का भी संयोग बन रहा है। यह संयोग 19 वर्षों बाद बन रहा है। इस योग में दूध, दही, मधु, चावल, पुष्प और गंगाजल से पूजा करना चाहिए। यह शिव का आर्शीवाद प्राप्त करने की उत्तम विधि है। पं. अशोक शास्त्री बताते हैं कि द्विपुष्कर योग वार, तिथि व नक्षत्र तीनों के संयोग से बनने वाला विशिष्ट योग है। इसमें किए गए काम की पुनरावृत्ति (दोहराना) नहीं होती है। श्रावण में ऐसा संयोग बन रहा है जिससे हर किसी को उपासना का लाभ मिलेगा।
रक्षाबंधन भी विशेष
- रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं पड़ेगा। सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो जाएगी। पं. शास्त्री ने बताया भद्रा में राखी नहीं बांधनी चाहिए। राखी हमेशा अपरान्ह समय बांधने की परंपरा है।
तीन योग जो खास हैं
1) सौभाग्य योग: इसे मंगलदायक योग भी कहते हैं। इस योग में की गई शादी से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। अकसर विवाह आदि मुहूर्त में यह योग देखा जाता है।
2) धनिष्ठा योग : इसका अर्थ होता है सबसे धनवान। वैदिक ज्योतिष की गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा को 23वां नक्षत्र माना जाता है। इस योग में जन्मे लोग बहुमुखी प्रतिभा और बुद्धि के धनी होते हैं।
3) द्विपुष्कर योग : यह योग वार, तिथि व नक्षत्र तीनों के संयोग से बनने वाला विशिष्ट योग है। इसमें धन लाभ होता है। धार्मिक यात्राएं करने से पुण्य मिलता है।

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