नोएडा बिल्डिंग हादसा: अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, बिल्डर्स अब भी ज्यादा घूस देकर अफसरों को सेट करने का कर रहे दावा : स्टिंग
नोएडा. पिछले दो साल से शाहबेरी में अवैध निर्माण धड़ल्ले से हो रहे हैं। प्राधिकरण के अधिकारी कागजों में अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के दावा करते रहे हैं। दो बिल्डिंग गिरने से हुए हादसे में 9 लोगों के शव निकलने के बाद एक स्टिंग में यहां के दो बिल्डरों ने साफ-साफ कह रहे हैं कि 5-10 दिन न्यूज चलेगी तभी तक दिक्कत है। इसके बाद अफसरों को थोड़ी ज्यादा घूस देकर सेट कर लेंगे। हालांकि जिन बिल्डरों ने यहां इमारतें खड़ी की हैं, उनका तो साफ कहना है कि हमारी तो शाहबेरी में बिल्डिंग है ही नहीं।
स्टिंग के दौरान हुई बातचीत के कुछ अंश…
बिल्डरों से रिपोर्टर ने फ्लैट खरीदार बनकर बात की।
रिपोर्टर : शाहबेरी में बिल्डिंग गिरने के बाद मीडिया से पता चला कि यहां की सभी बिल्डिंगें अवैध हैं।
बिल्डर :आप भरोसा खत्म करें ऐसा कुछ नहीं है। अभी मामला 5-10 दिनों तक मीडिया में रहेगा तभी तक दिक्कत है। जैसे ही न्यूज आनी बंद हो जाएगी तब उसके बाद फिर से अथॉरिटी, प्रशासन और दूसरे विभागों से सेटिंग हो जाएगी। तब कोई दिक्कत नहीं आएगी। पहले की तरह फिर से निर्माण कार्य होंगे और फ्लैट भी बेचे जाएंगे।
रिपोर्टर: हां, ठीक है कि सेटिंग हो जाएगी पर आपकी बात से लग रहा है शाहबेरी में निर्माण तो अवैध ही है फिर फ्लैट लेने पर बाद में भी दिक्कत होगी?
बिल्डर:ऐसा आपको लग रहा है। मगर आपको बात स्पष्ट कर दूंं कि यहां जो कुछ भी हो रहा है उस बारे में प्राधिकरण, प्रशासन, पुलिस, बिजली विभाग, रजिस्ट्री सभी को जानकारी है। भाई जी, अब ऐसा तो नहीं है कि हम लोग खिलौने की तरह बिल्डिंग को जेब में रखकर ले आए और शाहबेरी में रख दिया। मेन सड़क के किनारे बसा है शाहबेरी और हमेशा अधिकारी, नेता सभी आते रहते हैं। प्राधिकरण अधिकारियों को यहां के बारे में सब पता है।
रिपोर्टर:क्या आप प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारियों को पैसे भी देते हैं? मामला तूल पकड़ने पर आगे क्या पता दोबारा सेट नहीं हो पाएं।
बिल्डर :आप ही बताइए, आज तक हिंदुस्तान के अंदर क्या नहीं हुआ है। ऐसी क्या चीज है जिसका हल नहीं निकाला जा सकता है। प्राधिकरण अधिकारी या दूसरे विभागों के अधिकारी सभी अब तो सेटिंग के लिए ज्यादा पैसे मांगेंगे। अधिकारी पैसा खाने के चक्कर में ऐसा कर रहे हैं। वे कार्रवाई करने की बात किसी इंसानियत के नाते नहीं कर रहे हैं बल्कि पैसे की खातिर सब कुछ कर रहे हैं।
रिपोर्टर:सेटिंग भले ही हो जाए लेकिन गलत तो गलत ही होगा। यहां शायद निर्माण कार्य हो ही नहीं सकता, आगे सब ठीक होगा, कैसे भरोसा करें?
बिल्डर : देखिए मीडिया में जो कहा जा रहा है कि यहां निर्माण कार्य नहीं हो सकता है, वो गलत है। यहां फ्री होल्ड जमीन है। मतलब, सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए निर्माण कर सकते हैं। हां, 4 से ज्यादा फ्लोर नहीं बना सकते हैं। इसीलिए ज्यादा बनाने के लिए प्राधिकरण, प्रशासन व अन्य को पैसे देते हैं। यह समझ लीजिए की एक फ्लोर के एवज में सरकारी सिस्टम को 2-3 लाख रुपए तक देने पड़ जाते हैं। अब इस हादसे के बाद तो 3 लाख रुपए से ज्यादा की मांग होगी। जिस फाइनेंस वाले से शाहबेरी का लोन दिलाने की सेटिंग है उसे भी कमीशन देना पड़ता है। इसलिए आगे भी कोई दिक्कत नहीं आएगी। इससे बेफिक्र रहिए।
ये भी कहा...बिल्डर ने...
क्या बिल्डिंग खिलौने की तरह थी, जिसे जेब मेें रखकर ले आए और शाहबेरी में रख दिया। मेन सड़क पर 1000 से ज्यादा बिल्डिंगें बन चुकी हैं और सभी अधिकारियों को इसकी जानकारी है। हां, इतना जरूर है कि अब मीडिया में मामला आने के बाद उनका रेट बढ़ जाएगा।

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