जिस नेता के प्रचार के लिए शिवराज ने दिया था 'माई के लाल' का बयान, अब उसी नेता ने की भाजपा से बगावत - Web India Live

Breaking News

जिस नेता के प्रचार के लिए शिवराज ने दिया था 'माई के लाल' का बयान, अब उसी नेता ने की भाजपा से बगावत

भोपाल. मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा तब गर्मा गया था जब मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा था कोई माई का लाल आरक्षण नहीं हटा सकता है। शिवराज सिंह चौहान के इस बयान का मध्यप्रदेश में भारी विरोध हुआ था। इस बयान के कारण सवर्ण समाज की नाराजगी भी देखने को मिली थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार का कारण सवर्ण समजा की नाराजगी थी और सवर्णों की नाराजगी का कारण शिवराज के इसी बयान को माना जाता है। शिवराज ने जिस नेता के लिए यह बयान दिया था अब वही नेता भाजपा के खिलाफ बागी हो गया है और टिकट कटने से नाराज है।

कहां दिया था ये बयान
शहडोल लोकसभा में 2016 में उप चुनाव हुआ था। इस उपचुनाव में भाजपा ने शिवराज सरकार में मंत्री रहे ज्ञान सिंह को उम्मीदवार बनाया था। शिवराज सिंह समेत भाजपा के कई कद्दावर नेताओं ने उनके लिए प्रचार किया था। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बयान दिया था कि मेरे रहते कोई माई का लाल आरक्षण नहीं हटा सकता है। शहडोल आदिवासी बाहुल्य सीट है। शिवराज के इस बयान का मतलब यहां यहीं निकाला गया था कि इस बयान के माध्यम से शिवराज सिंह ने आदिवासी वोटरों को लुभाने की कोशिश की है। इसके बाद शिवराज ने कई मंचों से यह बयान दिया और धीरे-धीरे यह मामला तूल पकड़ता गया।

 

क्यों हुए थे उपचुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा के दलपत सिंह परस्ते को जीत मिली थी। लेकिन ब्रेन हेमरेज के कारण उनका निधन हो गया था। उनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी और यहां पर उपचुनाव हुए थे।

बयान का क्या असर था?
शिवराज के इस बयान का असर, मध्यप्रदेश विधानसभा में देखने को मिला था। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा था कि मध्य प्रदेश में बीजेपी की हार कारण माई के लाल का बयान था। शिवराज के इस बयान के कारण ही भाजपा को 10 से 15 सीटों का नुकसान हुआ है।

 

अब टिकट कटने से नाराज हैं ज्ञान सिंह
लोकसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे से शहडोल के मौजूदा सांसद नाराज हैं। ज्ञान सिंह की जगह भाजपा ने इस बार हिमाद्री सिंह को उम्मीदवार बनाया है। ज्ञान सिंह ने विरोध करते हिमाद्री सिंह के लिए प्रचार करने से मना कर दिया है और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की है। ज्ञान सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की पार्टी ने किसे टिकट दिया है, लेकिन उन्हें अफसोस है कि बिना किसी कारण के उनका टिकट काट दिया गया। उन्होंने कहा कि जिसे मैंने उपचुनाव में हराया था अब उसके समर्थन में वोट कैसे मागूंगा। जिसे मैंने 2016 के उपचुनाव में हराया और जिसके खिलाफ भाषणबाजी की अब उसके लिए वोट किस मुंह से मांगने जाऊंगा। बता दें कि ज्ञान सिंह ने 2016 के उपचुनाव में कांग्रेस की हिमाद्री सिंह को हराया था। हिमाद्री सिंह अब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई हैं।

पांच बार विधायक करे ज्ञान सिंह
ज्ञान सिंह मध्यप्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता माने जाते हैं। विंध्य की सियासत में इनकी अच्छी पकड़ है। ज्ञान सिंह पांच बार विधायक रहे और तीसरी बार सांसद बने। शिवराज सरकार में मंत्री भी रहे। अब निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा करके पार्टी की नींद उड़ा दी है। ज्ञान सिंह शहडोल संभाग में कभी कोई चुनाव नहीं हारे हैं।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2HGQbVZ
via

No comments