भाजपा में शुरु हुई बगावत, टिकट कटने से नाराज़ नेताओं ने बढ़ाईं मुश्किलें
भोपालः लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों के लिए सूचीबद्ध तौर पर टिकट वितरण की प्रकृिया जारी है। ऐसे में एक बार फिर विधानसभा चुनाव की तरह भाजपा में लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों ने पार्टी नेताओं का विरोध शुरू कर दिया है। कई नाराज़ प्रत्याशी तो ऐसे हैं, जिन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय ले लिया है जबकि कई प्रत्याशी अन्य दलों के संपर्क में भी बताए जा रहे हैं। हालांकि, इसपर डेमेज कंट्रोल करने के लिए संघ और पार्टी के आलानेताओं को मैदान में उतारा गया है, जो असंतुष्ठ नेताओं को मनाने का हर संभव प्रयास करेंगे।
कांग्रेस के संपर्क में हैं महापौर अशोक अर्गल!
विरोध की शुरुआत हुई मुरैना लोकसभा सीट से, जहां पार्टी ने दिग्गज नेता नरेन्दर सिंह तौमर को ग्वालियर के बजाय मुरैना सीट से टिकट दे दिया। पार्टी का ये फैसला मुरैना महापौर और पांच बार सांसद रहे अशोक अर्गल को नहीं भाया। उनका मानना था कि, इस सीट से उनका नाम देने के बजाय पार्टी ने तौमर को टिकट दे दिया। इस मामले पर अर्गल पार्टी नेताओं से खासे नाराज़ नज़र आ रहे हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि, अर्गल कांग्रेस के संपर्क में है। हालांकि, पार्टी द्वारा स्थानीय स्तर पर अर्गल को मनाने का प्रयास जारी है। देखना ये होगा कि, उनकी नाराजगी दूर होती है या नहीं।
भागीरथ प्रसाद ने सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द
वही टिकट कटने के बाद पार्टी के आला नेताओं से नाराज नज़र आए भागीरथ प्रसाद ने तो पार्टी के खिलाफ सोशल मीडिया पर ही मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए उन्होंने स्थानीय मतदाताओं का आभार माना है, जबकि भाजपा संगठन पर सवाल उठाए हैं। मुरैना से टिकट काटे जाने के बाद सांसद अनूप मिश्रा ने अभी मुंह नहीं खोला है, लेकिन वे नाराज बताए जा रहे हैं। वे कांग्रेस के संपर्क में हैं और उन्हें ग्वालियर से टिकट मिलने की उम्मीद है।
रिति पाठक को टिकट देने से बढ़ा विरोध
भाजपा में सबसे ज्यादा विरोध सिंगरौली लोकसभा प्रत्याशी रिति पाठक के खिलाफ देखने में आ रहा है। कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद पार्टी ने रिति को टिकट दिया। इससे नाराज होकर सिंगरौली जिलाध्यक्ष ने पार्टी को इस्तीफा दे दिया, जबकि रामलल्लूसिंह वैश्य ने भी खुलकर विरोध किया। पार्टी के प्रदेश नेताओं ने असंतुष्ठों को समझाया है। जिला अध्यक्ष ने इस्तीफा वापस ले लिया है। लेकिन माना जा रहा है कि, उनकी नाराज़गी अब तक दूर नहीं हुई है।
ज्ञान सिंह ने किया निर्दलीय लड़ने का ऐलान
शहडोल सीट पर भी विरोध के सुर काफी गर्म हैं। यहां साल 2016 में बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली प्रत्याशी को भाजपा ने अब अपना प्रत्याशी बनाया है। जिसके बाद यहां नाराजगी उभर कर सामने आई है। शहडोल से वर्तमान सांसद ज्ञान सिंह ने टिकट कटने के बाद पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंंने मीडिया से चर्चा के दौरान निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, इसके पीछे कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि, 2016 में हुए उपचुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस की जिस उम्मीदवार को हराकर सीट सुरक्षित की थी, अब पार्टी ने उसी को मेरा टिकट काटकर प्रत्याशी घोषित किया है और मुझसे कहा जा रहा है कि, मैं उनके लिए प्रचार करूं। इसलिए मैं अब निर्दलीय चुनाव लडूंगा। ज्ञान सिंह की नाराजगी और निर्दलीय लड़ने के ऐलान के बाद भाजपा में हड़कंप मच गया है। प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत ने उनसे फ़ोन पर चर्चा की है, वहीं हिमाद्रि भी उन्हें मानाने के प्रयास में है| तीन बार मंत्री पद पर रहने वाले ज्ञान सिंह शहडोल संभाग में कभी कोई चुनाव नहीं हारे। ज्ञान सिंह ने कहा कि जब वे लोकसभा का उपचुनाव नहीं लड़ना चाह रहे थे तब उन्हें मंत्री पद से हटाकर जबरन लोकसभा का चुनाव लड़ाया। उन्होंने कहा कि, अब जब वे खुद लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो पार्टी ने उनसे पूछा तक नहीं।
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