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स्वास्थ्य सेवाओं के भ्रष्टाचार को रोकने में आईएमए और एमसीआई भी रहा है नाकाम

भोपाल। द अलायंस ऑफ डॉक्टर्स फॉर एथिकल हेल्थकेयर(एडीईएच) ने रविवार को आईएसबीटी स्थित एक होटल में कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इसमें हेल्थ केयर के क्षेत्र में चुनौतियां और बेहतर भविष्य के लिए प्रभावी समाधान विषय पर एक्सपटर्स ने अपने विचार रखे। हेल्थ केयर यानी स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में बढ़ते हुए व्यवसायीकरण और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना।

कॉन्फ्रेंस का आयोजन डॉ. संजय भालेराव शिशु रोग विशेषज्ञ, इंदौर ने किया। उन्होंने हेल्थ केयर को व्यवसायिक प्रभाव से मुक्त रखा जाना बेहद जरूरी है। यह नेटवर्क हेल्थ केयर के क्षेत्र में सुधार और निगरानी की वकालत करता है। कॉन्फ्रेंस के मुख्य अतिथि डॉ. संजय नागराल और डॉ. समीर आनंदी है जो कि जाने-माने सर्जन और हिलर्स एंड प्रेडेटर्स नामक किताब के लेखक है।

अस्पतालों के व्यावसायीकरण पर लगे रोक

डॉ. नंदी ने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हर स्तर पर किस तरह से भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने इस भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए अस्पतालों में व्यावसायीकरण पर तुरंत रोक लगाने और स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा को पूरी तरह से बाजार के हाथ से मुक्त करने की बात कही। हीलर्स एंड प्रेडेटर्स के सह लेखक

डॉ. संजय नागराल ने कहा कि भारत का हेल्थ सिस्टम पूरी तरह से लाचार है और खुद डॉक्टरों को ही अपने भीतर झांक कर देखना होगा कि वे किस तरह से भ्रष्टाचार को खत्म करने में भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को नियंत्रित करने वाले पेशेवर निकाय जैसे आईएमए और एमसीआई भी हेल्थ केयर क्षेत्र में भारी भ्रष्टाचार और निजी हेल्थ केयर क्षेत्र में भ्रष्टाचार को रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। इस सत्र का मॉडरेशन एम्स की पैथोलॉजी डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. नीलकमल कपूर ने किया।

डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा होनी चाहिए बंद
भोपाल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. दीपक शाह और नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संजय गुप्ता ने डॉक्टरों के खिलाफ हो रही हिंसा पर अपनी बात रखी। उन्होंने डॉक्टरों के खिलाफ हो रही हिंसा के कारण और उसके प्रभाव की विवेचना की।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और मरीजों के बीच में कम्युनिकेशन बेहतर होना चाहिए इसके अलावा सारे अस्पतालों में मरीजों की समस्या और उनकी चिंताओं के निदान के लिए उपाय या निवारण सेल होना बहुत जरूरी है।

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सचिन सक्सेना ने पोस्ट ग्रेजुएट छात्र डॉक्टरों के समक्ष आ रही चुनौतियों पर अपनी बात रखी। उनका कहना था कि उन्हें शारीरिक, भावनात्मक और स्वास्थ्य सुरक्षा की बहुत जरूरत है।



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