शहर के बाजारों में, उपभोक्ताओं की सुविधाओं के अधूरे दावे
भोपाल. न्यू मार्केट के व्यापारियों द्वारा अवैध हॉकर्स को बाजार में स्थान देने नेताओं की दबाव की राजनीति को जाहिर करने के बाद पत्रिका ने जब शहर के अन्य बाजारों को लेकर पड़ताल की तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। पता चला, बीते सालों में इन बाजारों में उपभोक्ताओं की सुविधाओं के लिए जो दावे किए गए थे, वे पूरे ही नहीं हो पाए। पत्रिका ने शहर के चुनिंदा बाजारों में लोगों से यहां हुए कामों को लेकर अंक देने का कहा गया तो लगभग सभी बाजार उपभोक्ताओं की परीक्षा में फेल हो गए।
ऐसे समझे बाजार और दावे
- न्यू मार्केट
उपभोक्ता- 40 हजार से अधिक रोजाना
दावा- यहां की गलियों को लद्दाख के बाजारों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। नो-व्हीकल जोन, नो-हॉकर्स जोन, बाजार में अंडरग्राउंड फायर फायटर सिस्टम, पुलिस चौकी व अन्य।
स्थिति- स्मार्टसिटी के माध्यम से करीब 50 लाख रुपए की राशि खर्च की। आधी-अधूरी दो गलियां बनाई गई। नो-व्हीकल-नो हॉकर्स जोन के लिए जद्दोजहद चल ही रही है। अन्य सुविधाएं कुछ नहीं।
जनता ने दिए नंबर- दस में चार।
- चौक बाजार
उपभोक्ता- 50 हजार से अधिक रोजाना
दावा- 1000 साल पुराने ऐतिहासिक रंग में रंगा जाएगा। फर्श से लेकर लाइटिंग और दुकानों व बोर्ड का समान रंग-आकार होगा। नवाब व परमारकालीन यादों को ताजा किया जाएगा। नो-हॉकर्स व नो-व्हीकल जोन का दावा।
स्थिति- नगर निगम ने इसके लिए तीन करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार कराया। काम शुरू भी हुआ, लेकिन चार साल का समय बीत गया सिर्फ लाल पत्थरों का फर्श लगा वह भी आधा अधूरा। काम बंद है और बाजार अतिक्रमण-बेतरतीब ही है।
जनता ने दिए नंबर- दस में से तीन।
एमपी नगर
उपभोक्ता- 50 हजार से अधिक
दावा- पार्र्किंग की पूरी व्यवस्था, आरओ प्लांट से पीने का निशुल्क शुद्ध पानी, हॉकर्स कॉर्नर बनाकर फुटपाथों को आमजन के लिए मुक्त, बाजार के भीतर लोगों को फ्री आवाजाही के लिए इलेक्ट्रक रिक्शा शुरू करने जैसे काम के दावे।
स्थिति- करीब 65 करोड़ रुपए में मल्टीलेवल पार्र्किंग बनाई, लेकिन वाहनों को पार्क नहीं करवा पा रहे। आरओ प्लांट शुरू किया था, लेकिन बंद हो गया। सड़कों पर कोचिंग संस्थानों के छात्रों के साथ अन्य लोगों के वाहनों का कब्जा, 12 मीटर पर रोड दिन में 3 मीटर की ही बचती है।
जनता ने दिए नंबर- दस में से पांच।
- दस नंबर से बिट्टन मार्केट तक
उपभोक्ता- 30 हजार से अधिक रोजाना
दावा- यहां मेट्रो प्लाजा, हाट बाजार स्थल से लेकर रविशंकर मार्केट तक आदर्श बाजार के तौर पर विकसित करेंगे। उपभोक्ताओं को शुद्ध पानी के लिए आरओ सिस्टम लगाना। हॉकर्स कॉर्नर विकसित कर पार्र्किंग की अलग व्यवस्था करना।
स्थिति- पूरे बाजार में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं। फुटपाथ तक अतिक्रमण के दायरे में। हाट बाजार के कचरे से बिजली बनाने का प्लांट काम नहीं कर रहा। स्मार्टपार्र्किंग नाम की है, वाहन बाहर ही खड़े हो रहे। यहां आवासीय क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियां बढ़ी, जिससे पार्र्किंग की दिक्कत है।
नोट- बाजारों को नंबर यहां नियमित पहुंचने वालों से चर्चा के आधार पर।
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शहर में 25 बाजार, सभी में सुविधाओं की दरकार
कंफरडेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के रमाकांत तिवारी का कहना है कि शहर तमाम बाजारों में उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सुविधाओं की दरकार है। प्रशासन स्तर पर यहां काम तो शुरू हुए, लेकिन इसे जनता की सुविधा के अनुसार पूरे नहीं किए गए। न्यू मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश गंगराड़े का कहना है कि हम तो प्रशासन के साथ पूरे समर्थन से काम कर रहे हैं। उसे ही पूरा विकास करना चाहिए।
कोट्स
बाजारों में सुविधाओं की दरकार तो है। हालांकि हमने बीते सालों में काफी काम कराए हैं। चौक बाजार में भी काम हुआ और उसे पूरा भी किया जाएगा। ऐतिहासिक महत्व का बाजार है। न्यू मार्केट, एमपी नगर में मल्टीलेवल पार्किंग समेत अन्य काम भी किए हैं।
- आलोक शर्मा, महापौर
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मल्टीलेवल के बावजूद न्यू मार्केट और एमपी नगर में पार्र्किंग की दिक्कत है। दस मिनिट के काम के लिए बाजार जाएंगे तो मल्टीेलवल में पार्र्किंग करना मुश्किल है।
- रोहित विजयवर्गीय, रचना नगर
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बाजारों में उपभोक्ताओं की सुविधाओं को विकसित करने के दावे तो बड़े होते हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं हो पाता। दावे सिर्फ पैसा प्राप्त करने तक सिमित हैं।
- अंकित वर्मा, अशोका गार्डन
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मैं तो आजकल बहुत जरूरी होने पर ही मुख्य बाजारों में जाता हूं। पार्र्किंग से लेकर अन्य सुविधाओं के दावे तो पूरे होते लगते नहीं है। इन दिनों में एमपी नगर में बहुत दिक्कत होती है।
- रातेश खंडेलवाल, नेहरू नगर
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