संरक्षित जीवों वाले जलाशय किए जाएंगे संरक्षित
भोपाल. शहर के आसपास बड़ी संख्या में बाघ, तेंदुए, भालू, लकड़बग्घा, नीलगाय, काले हिरन, चीतल, भेड़की, सियार, लोमड़ी समेत कई प्रजातियों के वन्यजीव अच्छी तादात में हैं। इसके अलावा घडिय़ाल और दुर्लभ प्रजाति के कछुए, मगरमच्छ आदि संरक्षित जलीय जीव भी कलियासोत डैम, केरवा डैम, भदभदा वेटलैंड में दिखाई दे रहे हैं। पर्याप्त संरक्षण के अभाव में संरक्षित वन्य और जलीय जीवों पर खतरा मंडराता रहता है। इसके सिवा जंगलों में प्रे-बेस कम होने से वन्यजीवों का शहर की तरफ रुख करना चिंता का बड़ा कारण है। ऐसे कई बिन्दुओं पर पत्रिका ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक-वन्यजीव डॉ. यू प्रकाशम से बातचीत की:
सवाल: कलियासोत डैम और अन्य वनक्षेत्र के जलाशयों में जहां संरक्षित प्रजाति के वाइल्ड एनिमल्स हैं, उन्हें संरक्षित किया जाएगा?
जवाब: इस बारे में जानकारी ली जाएगी कि कलियासोत डैम में घडिय़ाल, कछुए और मगरमच्छ कितने और किस प्रजाति के हैं। यदि जरूरत होगी तो ऐसे डैम और जलाशयों को संरक्षित कराया जाएगा।
सवाल: केरवा-कलियासोत इलाके में निजी भूमि वालों को मुआवजा देकर बाहर शिफ्ट करने के तरीके पर अमल क्यों नहीं हो पा रहा?
जवाब: इस क्षेत्र का प्रकरण एनजीटी में विचाराधीन है। जब तक कोर्ट का स्पष्ट निर्णय नहीं आ जाता, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता। जब एनजीटी मामले को मॉनिटर कर रहा है तो जो भी आदेश होगा विभाग उसका पालन कराएगा।
सवाल: बाघों/वन्यजीवों के भ्रमण क्षेत्र में भारी वाहनों का आवागमन रोका जाएगा?
जवाब: कलियासोत-केरवा क्षेत्र का यह इलाका पूरा वन क्षेत्र नहीं है। प्रसाशनिक दृष्टि से यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं होने से डम्पर या अन्य वाहनों का आवागमन नहीं रोका जा सकता। यदि यह मार्ग वन क्षेत्र में होता तो वन विभाग प्रतिबंध लगा सकता था।
सवाल: शहर के आसपास टाइगर रहवासी क्षेत्रों में लेपर्ड मूवमेंट होने से मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व की आशंका बढ़ी है?
जवाब: यह सच है कि भोपाल के आसपास कई टाइगर्स का मूवमेंट है और हाल ही में शाहपुरा, आकाशगंगा कॉलोनी क्षेत्र में लेपर्ड का मूवमेंट सामने आया था। मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व रोकने के लिए विभागीय अमला सतर्क है। लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाएंगे, वॉलंटियर्स को भी अधिक सक्रिय करेंगे।
सवाल: शहर से सटे बाघ भ्रमण क्षेत्र से बार-बार वन विभाग के साइनेज नष्ट और विकृत करने से मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व हो सकता है?
जवाब: कहां साइनेज नष्ट किए या खराब किए गए हैं, उन्हें दिखवाया जाएगा। बाघ भ्रमण क्षेत्र में साइनेज लगाए जाएंगे, टूटे बैरियर्स ठीक कराए जाएंगे। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कलियासोत-केरवा क्षेत्र में फेंसिंग आदि काम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सवाल: रातापानी सेंक्चुरी में प्रे-बेस कम हो रहा है बाघों की संख्या बढ़ रही है, जिससे बाघ भोपाल के आसपास आ रहे हैं?
जवाब: टाइगर्स की संख्या बढऩा अच्छा संकेत है। प्रे-बेस बढ़ाने के लिए भोपाल के अलावा कान्हा, नौरादेही, संजय टाइगर रिजर्व में ग्रासलैंड बढ़ाएंगे, जिससे बाहरसिंगा, गौर, जंगली भैंसा आदि शाकाहारी जीवों की संख्या में वृद्धि होगी।
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