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कांग्रेस दो दिन में घोषित कर देगी प्रत्याशी, भाजपा टिकट की जल्दबाजी में नहीं

भोपाल. चुनाव की घोषणा होते ही कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवारों के चयन पर केंद्रित हो गई हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि कांग्रेस की पहली सूची दो दिन में आ जाएगी। पार्टी की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की बैठक सोमवार को दिल्ली में है। इसमें 12 से ज्यादा उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लग जाएगी। भाजपा इसके उलट टिकट बांटने की जल्दबाजी में नहीं है। भाजपा के तीनों दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश ङ्क्षसह और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव एकजुटता के संदेश के साथ 18 मार्च तक संयुक्त दौरे कर रहे हैं। भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति की पहली बैठक 19 या 20 मार्च को हो सकती है। इसके पहले संगठन पैनल तैयार करवा रहा है।
- लोकसभा में रहा भाजपा का दबदबा
लोकसभा चुनाव में हमेशा भाजपा का दबदबा रहा है। दिग्विजय सरकार के समय भी 10 साल तक भाजपा की लोकसभा सीटें कांग्रेस से ज्यादा रही हैं। 2014 के चुनाव में भाजपा ने 29 में से 27 सीटें जीती थीं। बाद में रतलाम सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसे कांग्रेस ने जीत लिया। अब कांग्रेस के पास तीन सीटें हैं।
- कर्जमाफी और ओबीसी आरक्षण बड़े हथियार
कांग्रेस इन दिनों जीत के रथ पर सवार है। कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में अपने वो वचन पूरे किए जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। पार्टी को उम्मीद है कि किसान कर्जमाफी और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण का दांव काम आएगा। वहीं, भाजपा के मौजूदा सांसदों के खिलाफ एंटी इन्कमबेंसी भी कांग्रेस को फायदा पहुंचा सकती है। कांग्रेस को सरकार बनने के बाद उभरी गुटबाजी भी थामना है। परेशान कार्यकर्ताओं को भी भरोसे में लेना है। कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री कमलनाथ, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह मुख्य रणनीतिकार हैं।

- यह है भाजपा की रणनीति
भाजपा का पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर फोकस रहेगा। मोदी-शाह के दौरे भी उसी तरह प्लान किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पार्टी कांग्रेस की सरकार के 80 दिन के कार्यकाल को विफल बताकर सवाल उठाने की तैयारी में है। इसमें किसानों की कर्जमाफी में हुए विलंब को मुद्दा बनाना, बढ़ते हुए अपराधों के मामले में सरकार को घेरना और तबादलों को लेकर मचे बवाल को पार्टी जनता तक पहुंचाएगी। एयर स्ट्राइक के बाद आई राष्ट्रीय भावना को जोड़कर मतदाताओं तक पहुंचना पार्टी की रणनीति में शामिल है।
- कांग्रेस में शामिल हुए बसपा नेता
बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सत्यप्रकाश सखवार और प्रदीप अहिरवार समेत अन्य पदाधिकारी कांग्रेस में शामिल हो गए। इन नेताओं ने कहा कि कांग्रेस के हाथ में ही प्रदेश और देश सुरक्षित है। इस मौके पर कमलनाथ ने प्रदेश में किसी भी प्रकार के गठबंधन से इनकार किया। कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश की जनता भोली है, लेकिन मूर्ख नहीं है, वो जानती है कि किसे वोट करना है। वो भाजपा के नेताओं के जुमलों से तंग आ चुकी है। भाजपा कभी राम मंदिर तो अब एयर स्ट्राइक को सियासी फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है।
- भाजपा में बढ़ी अंतर्कलह से मुश्किल
भाजपा में बढ़ी अंदरूनी कलह उसके लिए सबसे बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। सत्ता जाने के बाद बड़े नेताओं के अलग-अलग सुर निकलने लगे हैं। 15 साल तक एक सूत्र में बंधी भाजपा की माला के मोती बिखर गए हैं। घमासान रोकने के लिए तीन बड़े नेता संयुक्त दौरे कर रहे हैं। टिकट को लेकर भी पार्टी में भारी घमासान है। 16 मौजूदा सांसदों के खिलाफ भारी एंटी इन्कमबेंसी की रिपोर्ट संगठन को मिली है। भाजपा के लिए राहत की बात ये जरूर है कि उसे विधानसभा चुनाव में .01 फीसदी वोट कांग्रेस से ज्यादा मिला था भले ही उसकी सीट कांग्रेस से कम रह गईं। भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में शिवराज सिंह, राकेश सिंह, गोपाल भार्गव शामिल हंैं। हालांकि, पूरी रणनीति और उम्मीदवार शाह कार्यालय से ही तय हो रहे हैं।
- यहां भी बढ़ रही वंशवाद की बेल
लोकसभा चुनाव में भी वंशवाद का बोलवाला दिख रहा है। कांग्रेस में सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनीराजे सिंधिया ग्वालियर, मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ छिंदवाड़ा, मंत्री जीतू पटवारी की पत्नी रेणुका पटवारी इंदौर, विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कावरे के भाई पवन बालाघाट से और मंत्री सचिन यादव के भाई अरुण यादव खंडवा से प्रमुख दावेदार हैं। मंत्री सज्जन सिंह वर्मा अपने पुत्र को देवास से तो मंत्री तुलसी सिलावट अपने पुत्र को उज्जैन से टिकट दिलाना चाहते हैं। भाजपा में शिवराज की पत्नी साधना सिंह विदिशा, भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव सागर-दमोह, गौरीशंकर बिसेन की पुत्री मौसम बिसेन बालाघाट तो केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत के पुत्र जितेंद्र गेहलोत उज्जैन से चुनाव लडऩा चाहते हैं।
- ये दिग्गज रहेंगे मैदान में
कांग्रेस की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया, नकुलनाथ, कांतिलाल भूरिया, अजय सिंह, राजेंद्र सिंह, अरुण यादव और रामनिवास रावत जैसे दिग्गज नेता चुनाव मैदान में नजर आ सकते हैं। वहीं, भाजपा की ओर से नरेंद्र सिंह तोमर, सुमित्रा महाजन, गणेश सिंह और राकेश सिंह मैदान में रहेंगे।



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