पिता का चुनाव बेटों के लिए राजनीति की पाठशाला - Web India Live

Breaking News

पिता का चुनाव बेटों के लिए राजनीति की पाठशाला

जितेन्द्र चौरसिया, भोपाल. कुछ नेताओं ने लोकसभा के लिए चुनाव प्रबंधन की कमान अपने बेटों को सौंप रखी है। वे एक पंथ दो काज की रणनीति अपना रहे हैं। पहला तो उनकी मदद हो जाएगी। दूसरा ये कि बेटे भी अपनी राजनीतिक पिच तैयार कर लंगे। गुटीय कार्यकर्ता भी नेतापुत्रों की हर बात पर अमल करते हैं। दरअसल, चुनाव प्रबंधन में पैसों से लेकर रणनीतिक काम तक होते हैं। ऐसे में नेताओं को कार्यकर्ताओं की बजाए बेटे ज्यादा भरोसेमंद लगते हैं। हालांकि, पहले विश्वस्त साथी के जरिए बेटों को काम सिखाया जाता है, फिर पूरा प्रबंधन बेटों के हवाले कर दिया जाता है।
*** कांग्रेस
दिग्विजय सिंह - जयवद्र्धन सिंह
दिग्विजय सिंह भोपाल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां मंत्री पीसी शर्मा के साथ मंत्री बेटे जयवद्र्धन चुनाव प्रबंधन का जिम्मा संभाल रहे हैं। जयवद्र्धन सुबह से देर रात तक भोपाल लोकसभा सीट के लिए काम कर रहे हैं। इसमें बूथ मैपिंग से लेेकर सेक्टर वाइज रणनीति तक बनाना शामिल है। उनके लिए राजगढ़ के बाहर और लोकसभा चुनाव का काम करने का यह पहला मौका है।
कांतिलाल भूरिया - विक्रांत
रतलाम-झाबुआ सीट पर कांतिलाल के चुनाव प्रबंधन की कमान बेटे विक्रांत के हाथों में है। विक्रांत ने पिछले लोकसभा चुनाव में भी काम संभाला था। विक्रांत 2018 में विधानसभा चुनाव हार गए थे। अब वे संसदीय क्षेत्र में दौरे से लेकर कार्यकर्ताओं का प्रबंधन व बूथ रणनीति तक पर काम कर रहे हैं। भितरघात को संभालने का जिम्मा भी उनका है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया : महाआर्यमन
सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का टिकट घोषित नहीं हुआ है, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें मौजूदा गुना सीट पर लड़ाने की बात कही है। उत्तर प्रदेश में जिम्मेदारी के कारण सिंधिया अपने क्षेत्र में कम समय दे पा रहे हैं, इसलिए बेटे महाआर्यमन के साथ पत्नी प्रियदर्शनी राजे को सक्रिय किया है। महाआर्यमन पिछले चुनाव से सक्रिय है। कोलारस व मुंगावली विधानसभा उपचुनाव में महाआर्यमन ने मैदान संभाला था।

भाजपा
नरेंद्र सिंह तोमर : देवेंद्र
ग्वालियर सीट बदलकर मुरैना सीट से उतरने वाले नरेंद्र सिंह तोमर के चुनाव प्रबंधन का काम उनके बेटे देवेंद्र उर्फ रामू के पास है। देवेंद्र ग्वालियर में भी सक्रिय थे। विधानसभा चुनाव के समय भी देवेंद्र के टिकट की बात आई थी। अब देवेंद्र पिता के लिए बूथ मैनेजमेंट से लेकर चुनावी रणनीति तक संभाल रहे हैं। देवेंद्र चुनाव प्रबंधन संबंधित सभी निर्णय करते हैं।
नंदकुमार सिंह चौहान : हर्षवर्धन
भाजपा सांसद और खंडवा प्रत्याशी नंदकुमार सिंह चौहान का प्रबंधन कार्य उनके बेटे हर्षवर्धन के हाथ में है। हालांकि कुछ समय पूर्व जरूर हर्षवर्धन के कटनी हवाला कांड व पुलिस से विवादों में घिरने के चलते नंदकुमार को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। हर्षवर्धन चुनावी रणनीति से लेकर बूथ प्रबंधन और प्रचार तक की जिम्मेदारी संभालते हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में भी पूरा काम संभाला था।
जनार्दन मिश्रा : कबीर
रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा के बेटे कबीर क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। जनार्दन का चुनाव प्रबंधन कार्य कबीर देखते हैं। पिछले चुनाव में पिता के कुछ काम संभाले थे। जनार्दन के लिए बूथ प्रबंधन, प्रचार रूट से लेकर चुनावी खर्च सहित अन्य सभी काम कबीर के हाथ में हैं।

मैं क्षेत्र में सक्रिय रहता हूं। फिर बेटे को कुछ काम संभालने देना कोई गलत नहीं है। बेटा भी सक्रिय है और राजनीति कर रहा है।
- कांतिलाल भूरिया, सांसद कांग्रेस

हम अपना क्षेत्र खुद संभालते हैं। व्यापारी का बेटा व्यापार संभाल सकता है तो नेता का बेटा राजनीतिक काम क्यों नहीं कर सकता।
- नंदकुमार सिंह चौहान, सांसद भाजपा

 



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2FOEmLu
via

No comments