इन्होंने प्रयास किया तो बच गईं दर्जनों लोगों की जान
भोपाल । दुर्घटना या फिर इलाज की त्वरित व्यवस्था के नाम पर मोबाइल सर्विस काम कर रही है लेकिन इसमें कई ऐसे लोग हैं जिनकी सक्रियता के चलते अब तक कई लोगों की जान बच सकी। ये वे चालक और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने वाले कर्मचारी हैं जो 108 एम्बुलेंस में होते हैं। शहर में दौड़ रहीं दर्जनों एम्बुलेंस में काम के आधार पर इनका चुनाव हुआ। प्रोत्साहन के तौर पर इन्हें रियल हीरो नाम दिया गया है।
108 एम्बुलेंस में संजू रघुवंशी और चालक अब्दुल रहूफ न न केवल घायल एक मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचाया। साथ ही करीब 88 हजार की रकम जो मरीज ने वहीं छोड़ दी थी वह लौटा ईमानदारी की मिसाल पेश की।
इसके अलावा ओमप्रकाश पटेल और 108 चालक हसीम उद्दीन ने फोन काल्स पर सूचना मिलने के बाद तुरंत सक्रियता दिखाई। दुर्घटना के साथ हार्ट अटैक सहित कई मामलों में लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। इन्हें भी चुना गया।
आपात कालीन चिकित्सा सेवा मुहैया कराने शहर में 7 जननी एक्सप्रेस और 108 सेवा के तहत 17 एम्बुलेंस दौंड रही हैं। दुर्घटना की स्थिति में कहीं से फोन आने पर जल्द से जल्द मरीज को अस्पताल पहुंचाने के मामले में कुछ चालक और मेडिकल स्टॉफ बेहतर योगदान दे रहा है। इन्होंने बताया कि कई बार तो जरूरतमंदों की मदद भी देनी पड़ी। घायल केे साथ कोई नहीं था ऐसे में इस स्टाफ ने घायल को भर्ती कराने के साथ जरूरत का सामान तक मुहैया कराया। इसमें इएमटी यानि एम्बुलेंस में चिकित्सा के तैनात कर्मी में रानी शर्मा भी हैं। पिछले माह इन्होंने टीटी नगर लोकेशन से 78 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया। इसके चालक ताजवर रसूल ने भी पिछले माह बेहतर सेवाए देते हुए 108 लोगों की मदद की।
कैसे लौट सकती हैं धड़कनें, दिया जा रहा प्रशिक्षण
सड़क पर किसी के घायल होने पर अधिकांश लोग घबरा जाते हैं। क्या करना है ये ज्यादातर को पता नहीं होता। प्राथमिक उपचार के प्रति जागरुकता लाने के 108 के जरिए प्रशिक्षण दिया गया। ये आम लोगों के लिए था। इसमें उपचार के तरीकों के साथ कई सावधानियां भी सिखाई गई। शहर में कई स्थानों पर लोगों को इसकी जानकारी दी गई।
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हर रोज 108 हेल्प लाइन पर करीब 32 हजार फोन काल्स आते हैं। जिन एम्बुलेंस में चालक और चिकित्सा कर्मी की परफारमेंशन बेहतर रहा उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। इनकी सक्रियता के कारण कई लोगों की जान बच सकी। ये जल्द मौके पर पहुंचे।
जितेन्द्र शर्मा, प्रोजेक्ट हेड जिकित्सा
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