Lok Sabha Election 2019 : चुनावी नहीं, जमीनी होते दावे तो बदल जाती हकीकत
देवेंद्र शर्मा। भोपाल. लोकसभा के पिछले तीन चुनाव में जिन स्थानीय मुद्दों पर प्रत्याशियों ने लोगों से बात की, इस बार भी कमोबेश वे मौजूद हैं। बड़ा तालाब संरक्षण से लेकर शहर को हवाईयात्रा के मामले में देश का अग्रणी शहर बनाना, रेलवे में पासिंग स्टेशन की छवि को दूर कर ट्रेनों का यहीं से संचालन शुरू कराने से लेकर केंद्र की मदद से पब्तिक ट्रांसपोर्ट में मेट्रो और जैसी सुविधाएं जोडऩा।
2004 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन प्रत्याशियों ने राष्ट्रीय मुद्दों के बीच इन्हीं स्थानीय मुद्दों को जगह दी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा जारी विजन डाक्यूमेंट से लेकर भाजपा प्रत्याशी की रैलियों में राष्ट्रीय मुद्दों के साथ शहर से जुड़े इन मुद्दों पर बात हो रही है। पत्रिका ने आज के समय में इन लंबित मुद्दों की पड़ताल की तो पता चला, पंद्रह साल बाद भी स्थिति में अधिक सुधार नहीं है।
ऐसे समझे शहर से जुड़े विकास के मुद्दों की स्थिति
1. तालाब संरक्षण- बड़ा व छोटा तालाब संरक्षण के लिए 2004 में भोजवेट लैंड प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद शहर के अन्य 13 तालाबों पर काम शुरू करना था। संरक्षण के कामों के रखरखाव से लेकर नए काम को कराकर तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कर पुराने स्वरूप में लौटाने के दावे किए गए। तालाबों की दशा आज भी खराब है। 13 तालाबों में से 70 फीसदी अपने अस्तित्व की जंग लगभग हार गए। बड़े तालाब किनारे हाल में 1000 पक्के निर्माण मिले।
2. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई सुविधाएं- केंद्र की मदद से शहर को हवाई यात्रा के मामले में विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने का दावा। 2004 और इससे पहले से चला आ रहा है। 2008 में इसके तहत रनवे की लंबाई भी बढ़ाई। कार्गों हब विकसित करने की बातें भी हुई। मौजूदा स्थिति ज्यादा दुरूस्त नहीं हुई। एयरपोर्ट के ढांचागत सुधार जरूर हुए, लेकिन विश्वस्तरीय नहीं कहा जा सकता ।
3. रेलवे में अब भी पासिंग स्टेशन ही- रेलवे के मामले में काफी अच्छी लोकेशन पर होने के बावजूद भोपाल से अन्य बड़े शहरों या राज्यों पर ट्रेन शुरू कराना 2004 व इससे पहलेे से ही दावों में ही दिखता रहा है। रोजाना यहां से डेढ़ सो से अधिक ट्रेनें गुजरती है, लेकिन शुरू होने वाली बेहद कम है। राजधानी होने के नाते कई क्षेत्रों के लोग यहां रहते हैं, लेकिन अपने घरों को जाने उन्हें बड़ी दिक्कत उठाना पड़ती है।
4. सोलर सिटी- भोपाल को 2004 में सोलर सिटी के तौर पर विकसित करने की घोषणा हुई थी। ऊर्जा के मामले में राजधानी को आत्मनिर्भर बनाने के दावे के साथ केंद्र से बकायदा इसके लिए कागजी कार्रवाई भी शुरू हुई। सोलर एनर्जी से पूरे शहर और इसकी गलियों को रोशन करने बड़े प्रोजेक्ट लगाने का दावा था। 2019 में कुछ सोलर प्रोजेक्ट पर काम जरूर शुरू हुआ है, लेकिन अभी उपयोग में आने समय लगेगा।
5. टूरिस्ट व फिल्मसिटी- शहर में पर्यटन के साथ फिल्मसिटी बनाकर निवेश आमंत्रित करने के दावे किए गए। 2004 से 2009 के लगभग केरवा, कलियासोत क्षेत्र के गांवों में एक्सल वल्र्ड प्रोजेक्ट पर चर्चा भी हुई। कई बड़े उद्योगपतियों, फिल्मकारों ने जमीनें भी खरीदी, लेकिन बाद में कुछ नहीं हुआ। आज भी स्थिति पुरानी जैसी है। यहां मानवीय गतिविधियां बढ़ गई है।
इनका कहना
केंद्र और राज्य में जब से भाजपा सरकार रही तब विकास में कोई समझौता नहीं हुआ। भोपाल में मेट्रो से लेकर कई विकास कार्य केंद्र बीते पांच साल में तेज हुए और अब जमीन पर उतरने लगे हैं।
- विकास विरानी, जिलाध्यक्ष, भाजपा
केंद्र में कांग्रेस सरकार ने शहर विकास की कोई भी मांग नहीं रोकी। भाजपा के सांसदों के पास विकास का विजन ही नहीं है तो क्या कर सकते हैं। अब केंद्र में कांग्रेस आएगी और प्रदेश में भी कांग्रेस है। विकास तेज होगी।
- कैलाश मिश्रा, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
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