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एम्स में पहली बार हुए ऐसा, मरीज होंगे परेशान,छात्र करेंगे आंदोलन

भोपाल/ एम्स में इलाज कराना और पढऩा दोनों महंगा होने जा रहा है। केन्द्रीय सरकार ने एम्स में ट्यूशन फीस और मरीजों से वसूले जाने वाले शुल्क को बढ़ाने का फैसला किया है। एम्स भोपाल में यह पहली बार है कि मरीजों से वूसले जाने वाले शुल्क में बढ़ोत्तरी की जा रही है।

सभी एम्स की इंस्टीट्यूट बॉडी से ब्योरा जुटाने को कहा है। इस कवायद को देखते हुए एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट्स ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। एम्स स्टूडेंट्स एसोसिएशन भोपाल ने प्रधानमंत्री, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री सहित स्वास्थ्य मंत्रालय के आला अधिकारियों से इस फैसले को लागू न करने की अपील की है। मौजूदा समय में एम्स में एमबीबीएस व पीजी का शुल्क बहुत कम है।

एमबीबीएस के छात्रों को पूरे कोर्स के लिए 5,856 रुपये देने पड़ते हैं। वहीं, पीजी छात्रों (रेजिडेंट डॉक्टर) के लिए इसके अलावा 200 रुपये परीक्षा शुल्क और 16 हजार रुपये आवास भत्ता के रूप में उनके वेतन से कटता है। हालांकि देश के अन्य एम्स में फीस स्ट्रक्चर में अंतर है। इस वजह से एम्स के छात्रों को डर है कि यहां भी शुल्क में अधिक बढ़ोतरी हो सकती है।

प्रोसेसिंग फीस में भी है अंतर

कई राज्यों के एम्स में इलाज महंगा साबित है। उदाहरण तौर पर देखें तो दिल्ली के एम्स के जनरल वॉडज़् में जहां नॉरमल डिलीवरी निशुल्क और प्राइवेट वॉर्ड में इसकी फीस 2000 रुपये है। वहीं भोपाल एम्स में इसके लिए 3000 रुपये तक चार्ज किया जा रहा है। दिल्ली में घुटना प्रत्यारोपन में जहां 8000 रुपए तक फीस ली जाती है, वहीं ऋ षिकेश में इसके लिए 9900 रुपये तक भरने होते हैं। एम्स के डारयेक्टर डॉ. सरमन सिंह बताते हैं कि फिलहाल सर्कुलर देखा नहीं है। यह केन्द्रीय मंत्रालय का फैसला है, इसके बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं है।



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