विधानसभा सत्र के पहले विधायकों की डिमांड बढ़ी, वेतन-भत्तों को बढ़ाए जाने के लिए बनाया दबाव
भोपाल। अगले माह की 17 दिसम्बर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र के पहले विधायकों की डिमांड बढऩे लगी है। विधायकों ने वेतन-भत्तों को बढ़ाए जाने सहित अन्य सुविधाओं की मांग दोहराना शुरू कर दिया है। वे चाहते हैं कि पिछले सत्र में की गई घोषणाएं और वादे सरकार पूरा करे। साथ ही लंबित मांगों पर भी सरकार गौर करे। वेतन-भत्तों को बढ़ाए जाने के लिए इन्होंने दबाव बनाया है।
सुविधा की बैठक बुलाई गई
विधायकों की लगातार डिमांड के चलते हाल ही में विधानसभा की सदस्य सुविधा की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में विभागों की मांग और प्रस्ताव पर चर्चा हुई। हालांकि ज्यादातर मांगें आर्थिक होने के कारण तय किया गया कि इनके प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाए। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में हैं। विधायक चाहते हैं कि क्षेत्रीय विकास कार्य इत्यादि के लिए विधायक निधि में इजाफा होना चाहिए क्योंकि वर्तमान में मिल रही दो करोड़ की विधायक निधि कम है।
विधायक निधि दोगुनी होना चाहिए
जुलाई माह के विधानसभा सत्र में भी यह मांग उठी थी। सत्ता और विपक्षी दल के सदस्य इस बात पर सहमत थे कि विधायक निधि दोगुनी होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया था कि विधायकों की विधायक निधि में इजाफा होगा लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इसमें कितनी बढ़ोत्तरी होगी। लेकिन इतना जरूर कहा था कि नेता प्रतिपक्ष से चर्चा के बाद इस पर निर्णय होगा। राशि इतनी होगी कि विधायक संतुष्ट होंगे। अब चूंकि 17 दिसम्बर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में इसके पहले विधायकों ने फिर से दबाव बनाना शुरू किया है।
यात्रा कूपन के स्थान पर चाहिए डिजिटल कार्ड -
विधायकों को रेल यात्रा के लिए विधानसभा सचिवालय कूपन देता है। विधायक चाहते हैं कि उन्हें कूपन के स्थान पर डिजिटल कार्ड उपलब्ध कराया जाए। इस कार्ड में एक यूनिक नम्बर हो, यह नम्बर रेलवे में पंजीकृत होगा। इसी नम्बर के आधार पर ये टिकट बुक कर सकें और इसी से उनके टिकट का भुगतान हो जाए। चंूकि यह मामला रेल मंत्रालय से जुड़ा है, इसलिए यह प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भेजा जा रहा है। रेल मंत्री से चर्चा के बाद ही इस पर निर्णय होगा।
विधानसभा क्षेत्र में सरकारी मकान का प्रस्ताव सरकार को -
विधायक अपनी-अपनी विधानसभा क्षेत्र के मुख्यालय पर सरकारी मकान चाहते हैं। मकान ऐसा हो जिसमें वे अपना कार्यालय भी चला सकें। इसके पीछे तर्क है कि कई विधायकों के निजी निवास बहुत छोटे हैं। जनप्रतिधि होने के नाते आगंतुकों की संख्या अधिक होती है। आगंतुकों के बैठने के लिए स्थान उपलब्ध नहीं हो पाता। रिकार्ड रखने के लिए भी सुविधा नहीं है। विधायकों का यह प्रस्ताव राज्य सरकार के पास लंबित है। साथ ही वे प्रोटोकॉल में भी उचित स्थान मांग रहे हैं। इस मामले में भी सरकार को निर्णय लेना है।
वेतनभत्ते के लिए अन्य राज्यों का अध्ययन -
विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाए जाने के लिए स्पीकर ने विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे की अध्यक्षता में समिति गठित की है। यह समिति अन्य राज्यों के विधायकों के वेतन-भत्तों का अध्ययन कर रही है। इसमें यह देखा जा रहा है कि किस राज्य में विधायकों के वेतनभत्ते कितने-कितने हैं। संभावना है कि शीतकालीन सत्र के पहले समिति अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंप देगी।
सरकार को खजाने की चिंता -
विधायकों की बढ़ती मांग के कारण सरकार को खजाने की चिंता है। इसलिए इनकी मांगों को पूरा किए जाने के पहले खजाने की माली हालत को भी देखा जा रहा है। विधानसभा के पिछले सत्र में विधायकों ने मकान और चार पहिया गाड़ी के लिए कर्ज की सीमा बढ़ाए जाने की मांग थी। वे चाहते थे कि घर के लिए कर्ज सीमा 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख और चार पहिया गाड़ी के लिए कर्ज सीमा 15 लाख से बढ़ाकर 20 लाख की जाए। उस दौरान इस मांग पर विचार करने का भरोसा दिलाया गया था। अब यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। मालूम हो कर्ज पर चार प्रतिशत ब्याज विधायकों को देना होता है शेष राशि सरकार देती है।
विधायकों को प्रमुख सुविधाएं, वेतनभत्ते एक नजर में -- वेतन प्रतिमाह 30 हजार रुपए।
- निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 35 हजार रुपए प्रतिमाह।
- टेलीफोन भत्ता 10 हजार रुपए प्रतिमाह। (भले ही निवास स्थान पर टेलीफोन कनेक्शन हो या न हो)
- लेखन सामग्री और डाक भत्ता 10 हजार रुपए प्रतिमाह।
- कम्प्यूटर ऑपरेटर या अर्दली भत्ता 15 हजार रुपए प्रतिमाह।
- नि:शुल्क रेल और हवाई सुविधा।
विधायकों की विधायक निधि बढ़ाने, मकान और वाहन कर्ज सीमा बढ़ाए जाने सहित अन्य मांगें हैं। कर्ज सीमा बढ़ाए जाने का प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया है। विधायक निधि सहित अन्य मांगों का मामला वित्त मंत्री तय करेंगे।
- डॉ. गोविंद सिंह, संसदीय कार्यमंत्री
कमेटी ने विधायकों के प्रस्तावों पर विचार किया है। प्रस्ताव सरकार को भेजे गए हैं।
— घनश्याम सिंह, अध्यक्ष सदस्य सुविधा समिति मप्र विधानसभा
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