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स्थानीय चुनाव से पहले निकायों की सड़कें होगी चकाचक

भोपाल। स्थानीय चुनाव से पहले नगरीय निकायों की सभी सड़कें चकाचक होगी। सरकार ने सड़कों की निर्माण और पेंच वर्क के लिए निकायों को चार माह का समय दिया है। प्रदेश में सभी नगरीय निकायों की लगभग साढ़े तीन हजार किलोमीटर सड़कें खराब हैं।

बारिश के बाद से अभी तक में मात्र पांच सौ किलोमीटर ही सड़कें निकायों में बन पाई हैं। सरकार का पूरा फोकस निकाय चुनाव से पहले शहर की सड़कें के मरम्मत और निर्माण करने पर है। इसकी मुख्य वजह शहर की सबसे ज्यादा सड़कें खराब होना है। विभाग ने निकायों को साफ तौर पर कहा है कि सड़क निर्माण का बजट तीन माह पहले ही दिया जा चुका है, किसी भी हालत में चार माह के अंदर सड़कें दुरूस्त करें।

प्रमुख सचिव संजय दुबे ने सभी निकायों से बारिश के बाद से लेकर अब तक किए गए सड़कें के पेंच वर्क और निर्माण कार्यों की जानकारी तीन दिन के अंदर मांगी है। सड़कें खराब होने के मामले में नगर परिषद, नगर पालिका से आगे नगर निगम हैं।

दो हजार किमी सड़कें जर्जर

प्रदेश सभी 378 नगरीय निकायों में दो हजार किलोमीटर सड़कें काफी जर्जर हैं। निकायों को इन सड़कों में बारिश के तुरंत बात ही पेंच वर्क करना था, लेकिन इन में से 500 किलोटर ही हो पाया है। करीब 15 सौ किमी सड़कों का अभी तक पेंच रिपेयर नहीं हो पाया है। इन में से तीन सौ किलोमीटर सड़कें गारंटी पीरियड की हैं, जिन्हें ठेकेदारों को दुरूस्त करना है।


1500 किमी सड़कें पानी में बही

बारिश के चलते 15 सौ किमी सड़के पूरी तरह से पानी में बहने के कारण बड़े-बड़े गड्ढेे हो गए हैं। इन सड़कों को निकायों को नए सिरे से निर्माण कराना है। निकायों ने अभी तक मात्र 500 सौ किमी सड़कों का निर्माण कराया है। एक हजार किमी सड़कें आभी पूरी तरह से उखड़ी हुई हैं। इसके अलावा तीन सौ किमी सड़कों पर निर्माण कार्य चल रहा है, जो दो माह के अंदर पूरा हो जाएगा।

सबसे अच्छी स्थति भोपाल नगर निगम की

- भोपाल नगर निगम बारिश से सड़कें खराब होने के मामले में सबसे बेहतर स्थिति में है। यहां 11 किमी सड़कें पेंच वर्क करने के लायक थीं, जिसमें से साढ़े चार किमी सड़कों का पेंच वर्क करा लिया गया है, बांकी की सड़कों पर काम चल रहा है। इसी तरह तीन किमी सड़कें पूरी तरह से खराब हुई थीं, जिसका नए सिरे से निर्माण कराया गया है।
- इंदौर नगर निगम की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां 1080 किमी सड़कें खराब थीं। जिसमें 480 किमी पेंच रिपेयर कराने लायक थीं और 600 किमी सड़कें पूरी तरह से खराब हो गई थी। 1080 किमी में से 220 किमी पर सड़कें ही बन पाई हैं और 260 किमी पर काम चल रहा है।


- जबलपुर नगर निगम में 100 मिली सड़कों में पेंच वर्क होना था, जिसमें से अभी तक मात्र दस किमी पर ही यह काम हो पाया है। जबकि दस किमी सड़कों का नए सिरे से निर्माण कार्य किया जाना था, जिसमें अभी तक मात्र दो किमी में ही निर्माण कार्य कराया गया है। बांकी सड़कें पूरी तरह से उखड़ी हुई हैं।

- ग्वालियर नगर निगम सड़कों के निर्माण और पेंच वर्क के मामले में सबसे आगे है। यहां 53 किमी सड़कें खराब हुई थी, जिसमें से 40 किमी सड़कों का पेंच रिपेयर होना था और 13 किमी सड़कों का नए सिरे से निर्माण किया जाना था। नगर निगम में 38 किमी सड़कों का निर्माण और रिपेयर करा लिया है। जबकि अन्य सड़कों के निर्माण और पेंच वर्क का काम चल रहा है, जो अगले माह तक पूरा हो जाएगा।

निकायों को सभी सड़कें जल्दी से जल्दी दुरूस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट भी निकायों से बुलाई गई है।
एनपी मालवीय, ईएनसी, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग



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