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राज्यपाल बोले, न्यायालय के निर्णयों की कॉपी​ हिन्दी में भी उपलब्ध हो

भोपाल। संविधान सबका संरक्षक है, इसलिए अधिकारों की बात कर्तव्यों के साथ की जानी चाहिए। न्यायालय के निर्णयों की कॉपी हिन्दी में भी उपलब्ध हो। राजभवन में आयोजित संविधान दिवस पर राज्यपाल लालजी टंडन ये बात कही। इस मौके पर मुख्यमंत्री कमलनाथ, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एके मित्तल सहित हाईकोर्ट के न्यायाधीश, जिला न्यायाधीश सहित उपस्थित रहे।

राज्यपाल ने कहा कि संविधान में समाज में सबसे पीछे और कमजोर को प्राथमिकता दी गई है। न्याय प्रक्रिया में कमजोर व्यक्ति को त्वरित न्याय प्राप्त हो इस दिशा में और अधिक संवेदनशीलता के साथ प्रयास जरूरी है। संवैधानिक अधिकारों के साथ ही कर्तव्यों पर भी विचार किया जाना जरूरी है।

राज्यपाल ने न्यायपालिका की भूमिका की सराहना करते हुये कहा कि न्यायपालिका द्वारा राम जन्म भूमि विवाद का जो फैसला सुनाया है, उससे भारतीय संस्कृति का स्वरूप उभर कर आया हैं। संविधान दिवस पर राजभवन में समस्त न्यायपालिका के पहली बार एकत्रीकरण के लिए सभी को बधाई दी।

मुख्यमंत्री नाथ ने कहा है कि प्रजातंत्र का सम्मान बनाए रखने में विधायिका, कार्यपालिका से अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी न्याय पालिका की है। वर्तमान समय में लोगों की सोच में परिवर्तन हो रहा है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए बदलाव हुए है। आज न्यायालय में जो मुद्दे आ रहे हैं वह पहले नहीं होते थे, इन परिवर्तनों को न्याय प्रणाली के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस के अवसर पर संकल्प लेना चाहिये की हम कैसा देश भावी पीढ़ी को देना चाहते हैं। संविधान के प्रति गर्व के साथ ही विश्वास का भी प्रदर्शन किया जाना चाहिए।

संविधान दिवस राजनैतिक दलों द्वारा मनाए जाने वाला उत्सव नहीं है - चीफ जस्टिस

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एके मित्तल ने कहा कि संविधान दिवस राजनैतिक दलों द्वारा मनाए जाने वाला उत्सव नहीं माना चाहिए, बल्कि युवाओं को इस बात की जानकारी देना चाहिए कि हमारे संविधान निर्माताओं ने लोकतांत्रिक और आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण में कितने कठिन प्रयास किए।

उन्होंने आव्हान किया कि राष्ट्र निर्माण के लिए मूल अधिकारों के यथावत पालन के द्वारा सामाजिक और वैचारिक परिवर्तन की पहल की जाए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी संविधान कितना भी अच्छा बनाया गया हो वह स्वयं से उद्देश्यों की पूर्ति नहीं कर सकता। आवश्यक है कि संविधान के अंतर्गत नागरिकों की जीवनशैली और भावनाएं संविधान के उद्देश्यों के अनुरूप हो।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में विधि विभाग के प्रमुख सचिव सत्येन्द्र कुमार सिंह ने संविधान दिवस आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन राज्यपाल के सचिव मनोहर दुबे ने किया। इस अवसर पर विधि मंत्री पीसी शर्मा और मुख्य सचिव एसआर मोहंती भी उपस्थित थे।



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