थाने पहुंचा साध्वी का मामला, भाजपा-कांग्रेस दोनों ने की कार्रवाई की मांग
भोपाल। लोकसभा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) के हत्यारे नाथूराम गोडसे ( Nathuram Godse ) को देशभक्त कहने पर इस वक्त देशभर में राजनीति गर्माई हुई है। दिल्ली से लेकर मध्यप्रदेश तक कांग्रेस जमकर भाजपा की मोदी सरकार को कोस रही है। वहीं भाजपा नेताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है।
इंदौर में गुरुवार को कांग्रेस नेताओं ने थाने में प्रज्ञा ठाकुर की शिकायत की है। कांग्रेस के प्रदेश सचिव विवेक खंडेलवाल के मुताबिक भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर कई कांग्रेस कार्यकर्ता सेंटर कोतवाली पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस थाने में प्रज्ञा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से टालमटोल करते रहे। इसके बाद गुस्साए कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। हालांकि काफी देर चली बहस के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझाइश दी गई और उनसे आवेदन लेकर जांच की बात कहकर चलता कर दिया।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि मध्यप्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, तब मामूली बातों पर भी प्रकरण दर्ज कर लिया जाता था, लेकिन महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाली साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया गया है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत कांग्रेस के बड़े नेताओं को भी करने की बात कही है।
प्रज्ञा को रक्षा समिति से हटाया
सांसद प्रज्ञा ठाकुर को महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को लगातार देशभक्त बताने की कीमत चुकानी पड़ी है। आखिरकार बीजेपी ने गुरुवार को उन्हें रक्षा संबंधि मामलों की संसदीय समिति से निकाल दिया है। साथ ही उन पर इस सत्र में पार्टी की संसदीय दल की बैठक में शामिल होने पर भी रोक लगा दी है। हालांकि विपक्षी दल इस कार्रवाई को दिखावा बताते हुए प्रज्ञा को पार्टी से निकालने पर अड़े हैं। नतीजतन भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सफाई देने सामने आना पड़ा। नड्डा ने कहा कि हमारी पार्टी ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है।
इन्होंने भी किया विरोध
भोपाल मध्य के विधायक आरिफ मसूद ने अपने समर्थकों के साथ चार बत्ती चौराहे पर प्रज्ञा के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। मसूद ने संसद सत्र के बाद प्रज्ञा की जमानत निरस्त कराने की मांग की है। वहीं बीजेपी से पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा ने भी प्रज्ञा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। शर्मा ने कहा कि प्रज्ञा को प्रत्याशी बनाना ही गलत था। सांसदों पर कार्रवाई का अधिकार केंद्रीय संसदीय बोर्ड का है। प्रदेश संगठन को अधिकार नहीं है।
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