तत्कालीन स्टेशन प्रबंधक सहित 44 कर्मचारियों ने बचाईं थीं हजारों जानें, वर्ना हो जाता और अनर्थ

भोपाल। गैस त्रासदी की 35 वीं बरसी पर रेलवे के अधिकारियों ने भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन स्थापित शहीद स्मारक पर त्रासदी में मारे गए लोगों और रेलवे के अधिकारी व कर्मचारियों को श्रदांजलि आर्पित की। पुष्प माला चढ़ाने के बाद कुछ मिनट का मौन रखा गया। इस दौरान अपर रेल मंडल प्रबंधक अजीत रघुवंशी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग पटेरिया व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
इस त्रासदी में रेलवे के तत्कालीन भोपाल स्टेशन के प्रबंधक हरीश धुर्वे और अन्य 44 रेल कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर मुंह पर कपड़ा बांधे हांफते हुए ड्युटी पर डटे रहे, ताकि बीना और इटारसी की तरफ से आने वाली ट्रेनों को भोपाल पहुंचने से पहले ही रोका जा सके। बीना की तरफ से आने वाली ट्रेनों को सलामतपुर, विदिशा तथा इटारसी की तरफ से आने वाली ट्रेनों को मिसरोद, मंडीदीप ,औबेदुल्लागंज व बुदनी के आसपास रोक दिया गया। इस तरह दो दर्जन ट्रेनों को भोपाल आने से पहले ही रोक दिया गया, जिससे उन ट्रेनों में सवार हजारों यात्रियों की जान बच गई।
उक्त ट्रेनों को सही समय पर नहीं रुकवाया गया होता तो भोपाल पहुंचने के बाद इन ट्रेनों में सवार हजारों यात्रीगण जहरीली गैस की चपेट में आ जाते एवं उनकी जान जोखिम में पड़ जाती। भोपाल स्टेशन के तत्कालीन प्रबंधक हरीश धुर्वे अपना फर्ज निभाते हुए उसी रात शहीद हो गए थे, जबकि बाकि 44 कर्मचारियों में से कुछ कर्मचारी त्रासदी के एक सप्ताह बाद और कुछ कर्मचारीगण सालों के इलाज के बाद शहीद हो गये। इन सभी की याद में पश्चिम मध्य रेल के भोपाल स्टेशन परिसर में स्मारक बनाया गया है, जिसमें सभी 45 कर्मचारियों के नाम का उल्लेख है।
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