नर्मदा नदी में बनेगा घडिय़ालों का नया बसेरा - Web India Live

Breaking News

नर्मदा नदी में बनेगा घडिय़ालों का नया बसेरा

भोपाल। विलुप्त प्रजाति में शुमार घडिय़ालों बचाने के लिए सरकार नर्मदा नदी में नया बसेरा बनाने की तैयारी कर रही है। वन विभाग नर्मदा नदी घडि़यालों के लिए उपयुक्त और सुरक्षित जगह तलाशने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फारेस्ट मैनेजमेंट (आईआईएफएम) से अध्ययन कराएगी।

अध्ययन रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही घडिय़ालों के बच्चों को नर्मदा में छोड़ा जाएगा। जिन क्षेत्रों में इन्हें छोड़ा जाएगा वहां छोटी-छोटी जालियों से फेंसिंग की जाएगी, जिससे इनके बच्चे नदी से बाहर न निकल जाए। प्रदेश में वर्तमान में अभी घडिय़ाल चंबल और सोन नदी में हैं। दुनियाभर में संकट के दौर से गुजर रही घडिय़ालों को साफ पानी की नदियों में बसाने कबायत शुरू कर दी गई है। होशंगाबाद, जबलपुर, और शहड़ोल के वनवृत्तों को चिंहित किया गया है।

क्योंकि इन वत्तों में नर्मदा के किनारे घने जगल और रेत की भी पर्याप्त मात्रा है, जो घडिय़ालों के लिए काफी उपयुक्त माना जाता है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में इनके रहवास तैयार करने और सुरक्षा में वाइल्ड लाइफ के अमलों को बहुत ज्यादा काम नहीं करना पड़ेगा। घडिय़ालों को बसाने से पहले वन विभाग इस संबंध में अध्ययन कराएगा। रिपोर्ट में अनुकूल वातावरण पाए जाने पर ही नर्मदा में इन्हें उन स्थानों पर छोड़ जाएगा जहां सालभर पानी भरा रहता है।

चंबल में बढ़ी है घडिय़ालों की संख्या
प्रदेश में घडिय़ालों की संख्या बढ़ी है। इसकी मुख्य वजह चंबल से रेत उत्खनन पर प्रतिबंध होना और घडिय़ालों का संरक्षण होना बताया जा रहा है। फरवरी 2019 में चंबल नदी में कराई गई गिनती में 1857 घडिय़ाल पाए गए हैं। जबकि 2017 में इनकी संख्या 13 सौ के आस पास थी। वन विभाग के मुताबिक देश में सिर्फ यमुना और उसकी सहायक नदियों में पाए जाने वाले घडिय़ाल को बचाने की कोशिश की जा रही है। घडिय़ालों को प्रदेश और देश की अन्य साफ पानी की नदियों में बसाने की तैयारी चल रही है।


चंबल में दुनिया के 70 फीसदी घडिय़ाल
वन विभाग के अफसरों का दावा है कि वर्तमान में चंबल नदी में दुनिया के 70 फीसदी घडिय़ाल हैं। इसे बचाने के लिए मुरैना के देवरी प्रजनन केंद्र खोला गया है। जहां घडिय़ालों के अंडों को आर्टिफिशियल तरीके से हैकिंग कर बच्चों को सुरक्षित निकाला जाता है और शारीरिक रूप से मजबूत होने के बाद ही उन्हें नदी में छोड़ा जाता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 की तुलना में चंबल में घडिय़ालों की संख्या कई गुना बढ़ी है।

नर्मदा में छोडऩे पर विचार
घडिय़ालों की संख्या बढ़ाने के लिए नर्मदा नदी में नया बसेरा बनाने की तैयारी की जा रही है। इन्हें यहां छोडऩे से पहले अध्ययन किया जाएगा। अनुकूल रिपोर्ट मिलने के बाद ही उन्हें नर्मदा में छोड़ा जाएगा।
जेएस चौहान, अपर प्रधान मुख्य



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2Pq2aKa
via

No comments