आधा महीना सूखा बीता, जुलाई में डेढ़ दशक की सबसे कम बरसात
भोपाल. जिले में मानसून के सबसे ज्यादा बारिश वाले महीने जुलाई में इस वर्ष डेढ़ दशकों की सबसे कम बरसात हुई है। जुलाइ का आधा महीना बीतने तक मात्र चार सेमी या डेढ़ इंच बरसात ही हुई है जो कि 2006 के बाद सबसे कम है। अगले दो दिन में मानसूनी बादल छाने और बौछारें पडऩे की उम्मीद है, लेकिन यह मानसून बेरुखी यूं ही जारी रही तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं।
शहर में शुक्रवार को भी उमस और गर्मी ने जमकर सताया। शहर का न्यूनतम तापमान गुरुवार की अपेक्षा 1.7 डिग्री बढकऱ 26.9 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य स्तर से 3.3 डिग्री अधिक रहा। वहीं दिन में उमस और गर्मी के बीच तापमान लगभग स्थिर रहकर 33.7 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.3 डिग्री अधिक रहा।
वर्ष वर्षा (मिमी में)
2006 96.0
2007 326.7
2008 163.0
2009 177.9
2010 157.1
2011 21.0
वर्ष वर्षा (मिमी में)
2012 156.9
2013 138.9
2014 157.4
2015 72.7
2016 529.4
2017 67.0
वर्ष वर्षा (मिमी में)
2018 185.0
2019 174.2
2020 61.3
2021 42.7
(मौसम विभाग से प्राप्त आंकड़े)
खरीफ सीजन की कई फसलों की बोवनी पर संकट
मुरैना. मानसून की बेरुखी दस दिन तक ऐसी ही बनी रही तो खरीफ सीजन की ज्यादातर फसलों की बोवनी नहीं हो पाएगी। किसान बोवनी कर भी लेंगे तो पर्याप्त उत्पादन नहीं मिलेगा। साथ ही रबी सीजन की फसलों में भी पिछड़ जाएंगे। जिले में खरीफ फसलों के लिए निर्धारित 2.28 लाख हेक्टेयर में से महज 20 हजार हेक्टेयर में ही बोवनी हो सकी है। चटक धूप और अवर्षा के कारण जिन खेतों में बोवनी हुई है, वहां भी फसलें संकट में हैं। मालूम हो कि चंबल संभाग में खरीफ फसलों की देरी से बोवनी करने का चलन है। इसकी वजह किसानों का बारिश के पानी पर निर्भर होना है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि दस दिन और बारिश नहीं हुई तो खरीफ की चार प्रमुख फसलों की बोवनी पर ब्रेक लग जाएगा।
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