कोरोना में प्रैक्टिस छूटी, वजन बढ़ा, अब गोल्ड के लिए बहा रहे पसीना
भोपाल। कोरोना महामारी का सभी के जीवन पर असर पड़ा है, लेकिन खिलाडिय़ों परे इसका ज्यादा ही प्रभाव पड़ा है। उनकी कई प्रतियोगिताएं रद्द हो गईं। जिससे उनका कॅरियर भी प्रभावित हुआ है। हालांकि अब कुछ नॉन टचिंग खेलों के खिलाडिय़ों को अभ्यास की अनुमति मिल गई है। खिलाड़ी अब अपने स्तर पर तैयारी में जुट भी गए हैं। उनका लक्ष्य एशियन यूथ क्लाइंबिंग चैंपियनशिप है। इसका आयोजन इंडियन माउंटेयरिंग फाउंडेशन दिल्ली में किया जाएगा। इसके लिए शहर के ये खिलाड़ी अपनी किस्मत अजमाने के लिए क्लाइंबिंग वॉल पर चढ़ रहे हैं।
खिलाड़ी भारतीय टीम में जगह पाने के लिए बीयू स्थित क्लाइंबिंग वॉल पर पसीना बहा रहे हैं। इन्हें मप्र क्लाइंबिंग एसोसिएशन के सचिव और कोच मुकेश शर्मा ट्रेनिंग दे रहे हैं। शर्मा कहते हैं कि लॉकडाउन में खिलाडिय़ों ने फिटनेस पर काम तो किया है, लेकिन गेम की प्रैक्टिस न होने से वे अपना रिदम खो चुके हैं। इसलिए अभी बेसिक्स पर फोकस किया जा रहा है।
लीड क्लाइंबिंग पर फोकस कर रहा हूं
नेशनल क्लाइंबर उमेश शर्मा का कहना है कि लॉकडाउन में मैंने फिजिकल टे्रनिंग पर फोकस किया। मैं रनिंग, योग और मेडिटेशन करता था। अब अनलॉक में आगामी प्रतियोगिता की तैयारी के लिए पिछले तीन सप्ताह से बरकतउल्ला विवि कैंपस में प्रैक्टिस करने जा रहा हूं। क्लाइंबिंग में तीन इवेंट होते हैं जिसमें लीड, स्पीड और बोल्डरिंग शामिल हैं। मैं तीनों इवेंट में पार्टिसिपेट करता हूं। फिलहाल लीड क्लाइंबिंग पर फोकस कर रहा हूं। बहुत दिनों बाद क्लांबिंग की है तो हाथ भी जाम हो गए थे। वहीं, खिलाड़ी दीपाली कलोरे का कहना है कि मैं पिछले पांच महीने से क्लाइंबिंग कर रही हूं। पहली बार मैंने जब क्लाइंबिंग की तो बहुत ही डर लग रहा था। लेकिन धीरे-धीरे लीड क्लाइंबिंग करने लगी हूं। इसमें बॉडी वेट कम होना चाहिए। सीनियर खिलाड़ी और कोच मार्गदर्शन कर रहे हैं। इस खेल में जोश, जुनून और धैर्य रखना बहुत जरूरी होता है।
वजन कम करना भी चुनौती
नेशनल क्लाइंबर विवेक कुशवाह का कहना है कि बहुत दिनों बाद क्लाइंबिंग कर रहा हूं तो थकावट महसूस हो रही है। गेम में हिस्सा लेने के लिए 50 किलोग्राम वजन होना चाहिए लेकिन लॉकडाउन में वजन बढ़ गया था। मैं एक महीने का माउटेयरिंग का कोर्स करने उत्तराखंड जा रहा हूं तो इसके लिए भी तैयारी कर रहा हूं। इस क्लाइंबिंग से माउटेयरिंग में मदद मिलेगी। हर दिन मैं तीन घंटे प्रैक्टिस कर रहा हूं। नेशनल क्लाइंबर प्रियांश सेन का कहना है कि मैं पिछले नौ साल से क्लाइंबिंग कर रहा हूं। कोरोना के दौरान बहुत तनाव हुआ। समझ में नहीं आ रहा था कि आगे क्या होने वाला है। क्लाबिंग करते समय बॉडी का वेट कमर पर आता है इसलिए कोर स्ट्रैंथ मजबूत होनी चाहिए। अभी यह खेल ओलंपिक में आया है। जिससे आने वाले समय में अच्छे खिलाड़ी निकलेंगे। यह खेल तकनीक और पावर का गेम है। साथ ही खिलाड़ी को अपनी स्ट्रैंथ पर भी ध्यान देना होता है।
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