राज्यपाल बोले, वन अधिकार पत्र वितरण में देरी न हो, ग्रामसभाओं के माध्यम से निपटाए जाएं मामले
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिकार पत्र देने में देरी न हो। लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण में ग्राम सभा का सहयोग लिया जाए। इसके माध्यम से वन अधिकार पत्र दिए जाएं। ग्राम सभा में गांव के बुजुर्गों को भी शामिल किया जाना चाहिए। राज्यपाल राजभवन में अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस मौके पर वन मंत्री कुंवर विजय शाह और जनजातीय कार्य, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री मीना सिंह मांडवे भी मौजूद थी।
राज्यपाल ने कहा है कि अनुसूचित जाति, जनजाति समाज में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास जरूरी हैं। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के संबंध में ग्राम सभाओं में जानकारी दी जाए। हितग्राही मूलक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सकारात्मक सोच और संवेदनशील व्यवहार जरूरी है। लक्ष्य हो कि एक भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित नहीं रहे। स्थानीय उद्योगों और व्यवसाय में रोजगार की संभावनाओं के अनुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए। स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता मिले, इसके प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने वन विभाग द्वारा पौधरोपण कार्य के संबंध में जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि मिट्टी की जाँच करा कर, उसके अनुकूल पौधों का रोपण किया जाए।
प्रदेश में1469 वर्ग किलोमीटर बढ़ा वन क्षेत्र -
बैठक् के दौरान वन विभाग के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल ने विभाग की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून के आकलन में वर्ष 2005 से 2019 के दौरान प्रदेश का कुल वन क्षेत्र 1469 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। वहीं आदिम जाति कल्याण तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने बताया कि पर्यटन विभाग के साथ समन्वय कर स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर पर्यटन उद्योग से संबंधित विभिन्न कार्यों में रोजगार उपलब्ध कराने की पहल शुरू की गई है। बैठक में राज्यपाल के अपर सचिव मनोज खत्री, आयुक्त अनुसूचित जनजाति कार्य संजीव सिंह और संचालक ट्रायबल एरिया डेवलपमेंट एंड प्लानिंग शैलबाला मार्टिन भी मौजूद थी।
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