मंगलकामना और समृद्धि के प्रतीक होते हैं लक्ष्मी जी के पैर, घर पर जरूर बनाएं
भोपाल। दिवाली पर रंगोली का महत्त्व बहुत अधिक होता है, ताकि मां लक्ष्मी का घर में आगमन हो। दिवाली के दिन घरों में रंगोली अवश्य बनाना चाहिए। जानते हैं कि रंगोली में माता लक्ष्मी के पैर क्यों बनाते हैं।रंगोली के ये चिह्न समृद्धि और मंगलकामना का संकेत हैं। दिवाली पर घरों में मां लक्ष्मी पैर उकेरना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी सबके घरों में विचरण करती हैं। इसलिए लक्ष्मी के पैरों को घरों में माता के विचरण के तौर पर देखा जाता है। रंगोली हमेशा लाल गेरू, चावल, आटा या सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाई जाती है। कोशिश करें कि रसायन वाली चीजों से न बनाएं।
कहां से शुरू हुई रंगोली
रंगोली शब्द संस्कृत के एक शब्द 'रंगावली' से लिया गया है। इसे अल्पना भी कहा जाता है। भारत में इसे सिर्फ त्योहारों पर ही नहीं, बल्कि शुभ अवसरों, पूजा आदि पर भी बनाया जाता है। इससे जहां आने वाले मेहमानों का स्वागत होता है, वहीं भगवान के प्रसन्न होने की कल्पना भी की जाती है।
इससे जुड़ी प्राचीन कथा
एक बार भगवान शंकर हिमालय से दुनिया भ्रमण के लिए निकले और मां पार्वती से कहा कि जब मैं लौटूं तो घर और आंगन मन को प्रसन्न करने वाला मिलना चाहिए। नहीं तो मैं वापस लौट जाऊंगा। उनके जाने के बाद पार्वती जी ने घर में साफ-सफाई की और उसे स्वच्छ-सुंदर बनाने के लिए पूरा आंगन गोबर से लीपा भी। घर अभी पूरी तरह से सूखा भी नहीं था कि भगवान शंकर के आने की सूचना मिली। जल्दबाजी में मां पार्वती उसी गीले आंगन में जाने लगीं। उनके हाथ में फूल थे। वे भी वहां गिर गए। यह देख भगवान शंकर मंत्रमुग्ध हो उठे। बड़ी प्रसन्नता से उन्होंने कहा कि जिन-जिन घरों में रंगोली से सुंदरता उत्पन्न होगी, वहां-वहां मेरा वास रहेगा और हर प्रकार की समृद्धि वहां हमेशा विराजमान रहेगी।
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