रजिस्ट्री के 15 दिन के भीतर ही नामांतरण,खसरा-नक्शा में तत्काल सुधार
भोपाल. नए साल में मप्र देश का इकलौता राज्य बन जाएगा जहां सभी जिलों में साइबर तहसील व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रजिस्ट्री के 15 दिन के भीतर ही क्रेता के पक्ष खुद-ब-खुद नामांतरण हो जाएगा। इसके लिए कोई अलग से आवेदन नहीं करना होगा। अविवादित नामांतरण के लिए किसी को तहसील आने की जरूरत नहीं होगी। इसके साथ ही अविवादित खसरा-नक्शा आदि में ऑनलाइन ही सुधार हो जाएगा।
यह है योजना
साइबर तहसील के प्रथम चरण में केवल ऐसे अविवादित प्रकरणों में लागू किया जा रहा है जहां विक्रय पूरे खसरे का है। इसके बाद इसे सभी प्रकार के अविवादित नामांतरण और बंटवारे के प्रकरणों में लागू किया जाएगा। साइबर तहसील का सबसे बड़ा फायदा यह भी होगा कि जमीनों का काम ऑनलाइन, पेपरलेस और फेसलेस होगा। साथ ही नामांतरण भी ऑनलाइन होगा।
वीडियो काल पर सुनवाई
भोपाल में कोलार, हुजूर और बैरसिया में साइबर तहसीलें शुरू होगी। यहां वीडियो काल पर राजस्व कोर्ट की सुनवाई होगी। वाट्सएप पर ही दस्तावेज की ई-कापी मिल जाएगी। आरसीएमएस पोर्टल और सारा एप पर पटवारी ऑनलाइन प्रतिवेदन के लिए पत्र लिखेगा। कोई दावा आपत्ति न होने पर भूअभिलेख में नामांतरण अपडेट हो जाएगा। खसरे तथा नक्शे में क्रेता का नाम चढ़ जाएगा।
हर महीने तीन हजार आवेदन
जिले की तीन तहसीलों में हर महीने ढाई से तीन हजार आवेदन नामांतरण ओर बंटान के आते हैं। विवादित नामांतरण तो छह माह और साल भर से ज्यादा तक लंबित रहते हैं।
दतिया और सीहोर से हुई थी शुरुआत
२७ मई २०२२ को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दतिया और सीहोर में साइबर तहसीलें शुरू हुई थीं। इसके बाद अन्य जिलों में धीरे-धीरे यह व्यवस्था लागू हुई। अब एक जनवरी से पूरे प्रदेश में इसे लागू कर दिया जाएगा। साइबर तहसील के जरिए अब तक 16 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण हो चुका है।
साइबर तहसीलों की शुरूआत से नामांतरण,बंटवारे सहित अन्य जमीन संबंधी काम जल्द होंगे। वहीं लंबित प्रकरणों के निराकरण में कमी आएगी। जिससे सीएम हेल्पलाइन की स्थिति में सुधार होगा।
आशीष सिंह, कलेक्टर
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