भोपाल में भी कोरोना पॉजिटिव मरीज, होम आइसोलेशन में इलाज
भोपाल. इंदौर और जबलपुर के बाद राजधानी भोपाल में भी लंबे समय बाद एक महिला कोरोना पॉजिटिव मिली है। पीडि़त युवा महिला की ट्रैवल हिस्ट्री है। भोपाल में जांच के बाद उसे कोराना की पुष्टि हुई। इस तरह प्रदेश में तीन पॉजिटिव मरीज हो गए हैं। इस बीच कोविड के नए वैरिएंट जेएन.1 को लेकर प्रदेशभर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। वायरस की जांच के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है।
प्रदेश में रोजना १०० जांच
सीएमएचओ प्रभाकर तिवारी ने बताया महिला की हालत ठीक है। उसमें ऊपरी तौर पर कोरोना के लक्षण नजर नहीं आए हैं। उसे होम आइसोलेशन का सुझाव दिया गया है। शुक्रवार को जेपी व जीएमसी के फीवर क्लीनिक में 21 की जांच हुई। और प्रदेश में रोजाना औसतन सौ कोविड जांचें हो रही हैं। शुक्रवार से जीनोम सीक्वेंसिंग भी शुरू हो गयी है। तीन दर्जन सैंपल एम्स लैब में आए हैं। पहले बैच की रिपोर्ट आने में चार से पांच दिन का समय लगेगा।
एक मरीज डिस्चार्च, दो एक्टिव
जबलपुर में एक मरीज कोरोना से रिकवर हुआ है। उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है। अब प्रदेश में सिर्फ तीन मरीज एक्टिव हैं। जिसमें से एक इंदौर और एक जबलपुर में है। जबकि नया मरीजा भोपाल का है।
जीनोम सीक्वेंसिंग में खर्च ज्यादा
कोरोना सैंपल के एक बैच की जीनोम सीक्वेंसिंग में खर्च अधिक आता है। इसलिए जीएमसी की स्टेट वायरोलॉजी लैब में जीनोम सीक्वेंसिंग अभी शुरू नहीं हुई है। जांच के लिए ज्यादा लोगों के आने पर जीएमसी में सीक्वेंसिंग के लिए रिएजेंट उपलब्ध कराए जाएंगे। गौरतलब है जीएमसी में पांच करोड़ की लागत से यह व्यवस्था पहले शुरू हुई थी।
क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग
एम्स के माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. देवाशीष बताते हैं जीनोम सीक्वेंसिंग किसी वायरस का बायोडाटा होता है। वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। इसे जानने की विधि ही जीनोम सीक्वेंसिंग कहलाती हैं। इससे कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चलता है।
एम्स में भी होगी जांच
एम्स प्रबंधन ने कोविड पर समीक्षा बैठक की। एम्स निदेशक ने ओपीडी से लेकर आइपीडी में संदिग्ध मरीजों की जांच निर्देश दिए हैं। साथ ही आइसोलेट वार्ड और आइसीयू की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है।
यह है व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश के अस्पतालों में 2300 वेटिंलेटर के अलावा 16 हजार ऑक्सीजन सपोर्ट बेड और 5800 आईसीयू बेड रिजर्व रखे हैं। ऑक्सीजन को लेकर 49 पीएसए प्लांट और 209 पीएसए प्लांट का मॉक ड्रिल किया गया। ऑक्सीजन की क्षमता 91 हजार 535 लीटर प्रति मिनट हैं। वहीं, मॉक ड्रिल में जहां कमियां मिली है, उनको दूर करने को कहा गया है।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/v4Rs3E0
via
No comments