पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास आवंटन रद्द, गृह विभाग ने पीडब्ल्यूडी को बंगले खाली कराने को लिखा पत्र - Web India Live

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पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास आवंटन रद्द, गृह विभाग ने पीडब्ल्यूडी को बंगले खाली कराने को लिखा पत्र


भोपाल। मध्यप्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से कैलाश जोशी, दिग्विजय सिंह, उमा भारती और बाबूलाल गौर को दिए गए बंगलों का आवंटन सरकार ने रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर पिछले माह पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन नि:शुल्क आवास देने की व्यवस्था को अवैधानिक ठहराते हुए एक महीने में कार्रवाई करने को कहा था। गृह विभाग ने आवंटन निरस्त कर हाईकोर्ट को अवगत करा दिया है। विभाग ने महाधिवक्ता कार्यालय को सूचना भेजने के साथ ही लोक निर्माण विभाग को जल्द से जल्द बंगले खाली करवाने के लिए लिखा है।
गृह विभाग के अनुसार, हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास आवंटन निरस्त किए गए हैं। इन्हें अब यदि दोबारा सरकारी आवास देने हैं तो सरकार को अलग से निर्णय लेना होगा। बताया जा रहा है कि दिग्विजय सिंह को सांसद और बाबूलाल गौर को विधायक की हैसियत से आवास आवंटित हो सकते हैं। इसका उपयोग करते हुए ही उन्होंने जबलपुर से सांसद राकेश सिंह को भोपाल में आवास आवंटित किया है। दरअसल, समस्या पूर्व मुख्यमंत्री व मौजूदा केंद्रीय मंत्री उमा भारती और कैलाश जोशी को लेकर ज्यादा है।
नियम क्या कहता है : नियम यह है कि सिर्फ उन्हीं पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास दिया जा सकता है जो मप्र की किसी विधानसभा या संसद क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हो। प्रमुख सचिव गृह मलय श्रीवास्तव ने बताया कि हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश का पालन कर सूचना महाधिवक्ता और लोक निर्माण विभाग को भेज दी है।
यहां फंसा है पेंच, सिंधिया और तन्खा के आवेदन : गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने भी सरकार से भोपाल में आवास की मांग की है। सरकार ने इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया है। एडीएम कार्यालय पहुंचे नोटिस पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास आवंटन रद्द करने के बाद नोटिस एडीएम दफ्तर भेज दिए गए हैं। एडीएम से कहा गया है कि वे व्यक्तिगत रूप से नोटिस पूर्व मुख्यमंत्रियों के घर पहुंचाएं और तामिल कराएं।
निर्णय मान्य होगा :पूर्व मुख्यमंत्रियों कैलाश जोशी और उमा भारती पहले ही बंगले खाली करने के लिए कह चुके हैं। कैलाश जोशी का कहना है कि सरकार का जो भी निर्णय होगा, वह मान्य होगा। सरकार रास्ता निकाल रही है।

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