मिट्टी में होता है पंचतत्व मिश्रण, इनकी प्रतिमाओं का पूजन करने से मिटती है नकारात्मक ऊर्जा
भरतपुर| गणेश चतुर्थी 13 सितंबर को मनाई जाएगी। इस बार भी आप त्योहार को भव्यता से मनाएंए लेकिन प्लास्टर आफ पेरिस से बनी प्रतिमा नहींए बल्कि मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को ही स्थापित करें। क्योंकि गणेशोत्सव में मिट्टी के गणेश ही पूजा अर्चना कर सफलता की राह खोल सकते हैं। मिट्टी के गणेश के पूजन से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
पौराणिक कथाओं में भी इसका उल्लेख है। एक कथा के अनुसारए भगवान शंकर त्रिपुरा सुर राक्षस का वध करने में असफल हुए थे। उन्होंने जब अपनी असफलता पर विचार किया तो उन्हें लगा कि वह बगैर गणेश पूजन के ही युद्ध के लिए गए थे। दूसरी बार युद्ध में उन्होंने पहले पार्थिव ;मिट्टीद्ध गणेश प्रतिमा का पूजन किया। इसके बाद उन्हें त्रिपुरा सुर राक्षस का वध करने में सफलता मिली। शास्त्रों में इसका उल्लेख मिलता है।
पं मनु मुदगल के अनुसार मिट्टी व गोबर के मिश्रण से बनी प्रतिमा में पंचतत्व हवाए पानीए मिट्टीएअग्नि व वायु का वास माना जाता है। मिट्टी के गणेश की प्रतिमा के दर्शन व पूजा अर्चना करने मात्र से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है। शास्त्रों में भी उल्लेख है कि मिट्टी या फिर मिट्टी व गोबर के मिश्रण से बनी गणेश प्रतिमाओं की पूजा अर्चना करने से हमारी व घर की नकारात्मक ऊर्जा तो नष्ट होती है। साथ में अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में बुध ग्रह अशुभ होता है तो ग्रह भी शांत होता है।
मिट्टी से जन्मे श्री गणेश
पंण् राममोहन शर्मा ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार मां पार्वती ने मिट्टी से ही गणेश जी की रचना की थी। इसलिए शादी.विवाह सहित तमाम मांगलिक कार्यों में गणेश जी की स्थापना मिट्टी के ढेले को ही कलावा बांध कर की जाती है। इसके एक मात्र कारण मिट्टी से जुड़ाव बनाए रखना है। गणेश महोत्सव में परंपरानुसार लोग तीनए पांचए सात व 11 दिन के लिए गणपति बप्पा को घरों में विराजमान कराते हैं।

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