गणेश चतुर्थी: 13 सितंबर को होगी भगवान गणेश जी की स्थापना, जानिए कुछ जरूरी बातें और नियम
13 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। गणेश स्थापना के लिए दिशा और जगह की शुद्धता का ध्यान रखना जरूरी है। इस दिन कईं घरों और ऑफिस में गणेश जी की स्थापना की जाती हैए लेकिन कई बार अनजाने में गलत जगह या वास्तु के अनुसार गलत दिशा में गणेश जी की मूर्ति स्थापित हो जाती है। जिसके कारण पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता। उलटा दोष भी लगता है। गणेश स्थापना के लिए दिशा और जगह की शुद्धता का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। वहीं इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि गणेश जी की पीठ किस दिशा में होनी चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
1. गणेश जी को विराजमान करने के लिए ब्रह्म स्थानए पूर्व दिशा और उत्तर पूर्व कोण शुभ माना गया है लेकिन भूलकर भी इन्हें दक्षिण और दक्षिण पश्चिम कोण यानी नैऋत्य में नहीं रखें इससे हानि होती है।
2. घर या आॅफिस में एक ही जगह पर गणेश जी की दो मूर्ति एक साथ नहीं रखें। वास्तु विज्ञान के अनुसार इससे उर्जा का आपस में टकराव होता है जो अशुभ फल देता है। अगर एक से अधिक गणेश जी की मूर्ति है तो दोनों को अलग.अलग स्थानों पर रखें।
3. भगवान गणेश को मंगलमुखी भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि गणेश जी के मुख की तरफ समृद्धिए सिद्धिए सुख और सौभाग्य होता है। वहीं गणेश जी के पृष्ठ भाग पर दुख और दरिद्रता का वास माना गया है। इसलिए गणेश जी की स्थापना के समय ये ध्यान रखें कि मूर्ति का मुख दरवाजे की तरफ नहीं होना चाहिए।
4. घर में गणेश जी की बांयीं ओर सूंड वाली मूर्ति रखना अधिक मंगलकारी माना गया है क्योंकि इनकी पूजा से जल्दी फल की प्राप्ति होती है। दायीं ओर सूंड वाले गणपति देर से प्रसन्न होते हैं।
5. गणेश जी की प्रतिमा के पीछे दिवार होनी चाहिए। प्रतिमा के पीछे खाली जगह नहीं होनी चाहिए।

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