भगवान श्रीकृष्ण की ईष्ट है गौमाताए इसे पीड़ा न पहुँचाये : आचार्य मृदुल कृष्ण
-आचार्य ने व्यासगादी से दिया आदेश और किया निवेदन: पॉलिथीन का न करें उपयोग
भोपाल। संत हिरदाराम नगर में संत शिरोमणि हिरदाराम जी साहिब के आंगन में श्रीमद भागवत कथा के पांचवे दिन शनिवार को आचार्य श्री मृदुल कृष्ण जी महाराज ने कथा में गौ सेवा का महत्व बताया। भागवत में जिक्र किया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी गौ सेवा की है। भगवान नंगे पांव जंगल जाकर गौ चराते थे। भगवान की ईष्ट गौ माता है। महाराज जी ने व्यास गादी से आदेश और निवेदन किया कि पॉलिथीन का उपयोग बंद करें। पॉलिथीन में खाद्य सामग्री रखकर फेंकते है जिसे गौ माता पन्नी सहित खाती है जिससे गौ माता को पीड़ा होती है यह महा पाप है। आज भगवान श्रीकृष्ण की रास लीलाओं का वर्णन पंडाल में किया गया। इस दौरान भजन कीर्तन में श्रृद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। झांकी के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने माखन चोर बनकर मटकी फोड़ी। आज छप्पन भोग का प्रसाद भगवान गोवर्धन को लगाया गया। आज कथा श्रवण करने 20 हजार से अधिक श्रृद्धालु गण उपस्थित थे। कल रूकमणि मंगल की कथा का आयोजन किया जायेगा।
मन में सिर्फ भगवान का वास
आचार्य श्री ने कथा शुरू करते हुये प्रसंग सुनाया कि दूध और मिश्री को मिलायेंगे तो वह मिल जायेंगेंए परंतु पत्थर और पत्थर मिलायेंगे तो वह कभी नहीं मिलेगा। यह मन भगवान के सिवा कही नहीं लग सकता है। मन का आभाव ही परमात्मा और प्रभु है। मन को ज्यादा संसार में लगाते है तो वह छटपटाता है परेशान हो जाता है। लेकिन अगर इसी मन को हम प्रभु में लगाते है तो वह शांत और आनंदित रहता है।
हृदय से जीना सीखेए ना कि बुद्धि से: महाराज जी
आचार्य मृदुल कृष्ण महाराज ने कथा का वाचन करते हुये बताया कि बुद्धि कैची है और हृदय सुई की तरह काम करती है। कैची का काम काटना है और सुई का काम जोड़ना है। बृद्धि में विचार होता है और हृदय में विवेक। बुद्धि निर्णय का आश्वासन देती है और विवेक निर्णय दे देता है। मन में संकल्प और विकल्प उठते है। कथा आनंद ही भगवान है। उस आनंद से हृदय से जियेए बुद्धि से नहीं। हर जगह बुद्धि का उपयोग नहीं करना चाहिये। आनंद में जीना उल्लास और उमंग में जीने जैसा है। महाराज ने कहा कि मन का कही ठहराव होगाए कही टिकेगा परंतु भगवान के सिवा मन कही टिक ही नहीं सकता।
भगवान को धन्यवाद देकर जीवन जीये: आचार्य मृदुल कृष्ण जी महाराज
आचार्य श्री ने कहा कि व्यक्ति को निरंतर भगवान का धन्यवाद करना चाहिये। वे छोटे या बड़े कामों पर भगवान का धन्यवाद देकर जीवन जिये। वह अपनी प्रार्थना में कहे कि भगवान आपकी बड़ी महरबानी है। ऐसे में अगर व्यक्ति भगवान को धन्यवाद देकर जीता है तो निश्चित ही भगवान उन्हें वह देंगे जो वह चाहते है। जितना मिले पहले उसके लिये भगवान का धन्यवाद दे। कही ऐसा न हो जो मिला वह भी न छूट जाये इसलिये प्रभु को धन्यवाद अवश्य देए हमेशा दे। भोजन खाने के पहले आरै बाद में भी प्रभु को जरूर धन्यवाद देना चाहिये। प्रभु का आशीर्वाद और प्राप्त करने के लिये धन्यवाद जरूर देना चाहिये।
व्यक्ति के जीवन में सुख और दुख अवश्य आते है
हर सुख के पीछे दुख होता है और हर दुख के पीछे दुख भी होता है। लेकिन प्रभु को याद करने वाले के जीवन में आनंद ही आनंद होता है। वह व्यक्ति सुख और दुख को भूलकर आनंद में ही रहता है। आनंद का रंग जीवन भर सफेद ही रहता है। भगवान से जुड़ने वाला भक्त सदैव आनंद में रहता है। आनंद भक्त को मजबूत करता है कोई भक्त को हिला नहीं सकता है। इसलिये भक्त को प्रभु से जुड़कर हमेशा आनंद में रहना चाहिये।
भगवान के प्रसाद में आनंद और प्रसन्नता है: मृदुल
आचार्य मृदुल कृष्ण जी ने आजकल मिलने वाले क्षणिक सुख की तुलना भगवान के भक्ति मय आनंद से की है। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रसाद में आनंद और प्रसन्नता है। संसार का सुख क्षणिक है कभी.कभी हम क्षणिक सुख को आनंद मान लेते है लेकिन यह क्षणिक सुख परम आनंद नहीं है। आचार्य जी ने 4 मित्रों की कहानी सुनाते हुये कहा कि वह एक सुख मिलने वाली दुकान में गयेए लेकिन चारों और वहां जूतों की मार मिली। लेकिन उन्होंने एक.दूसरे से इसका जिक्र नहीं किया। इसका आशय यह है कि किसी दुकान में नहीं मिल सकता। आनंद का स्वरूप एक ही है जीव को आनंद मिलना यानी प्रभु से सीधे जुड़ना है।
रोजाना घर में करें भागवत का पाठ: आचार्य मृदुल
आचार्य महाराज ने श्रीमद भागवत जी का महत्व बताते हुये सीख दी है कि व्यक्ति को रोजाना घर में एक भागवत का पाठ करना चाहिये। भले ही वह एक चरण ही बोलेए श्री गोविंदायः नमो नमः यह दीजिये। भागवत जी में लिखा है कि जो भागवत का एक चरण ही बोलता है उस जीव की परागती ही होगी।
जहां भगवान श्रीकृष्ण की पूजा होती है वहां लक्ष्मी का वास होता है
कृष्ण का अर्थ होता है भगवान। भगवान वह होते है जो अपनी ओर खिंचता है जैसे भगवान का रूपए लीलाए परिपक्ष्य है उसे ही भगवान कृष्ण कहते है। ऐसे में चलते फिरते प्रभु के नाम का जाप करते रहा करोय जिस घर में भगवान श्री कृष्ण की पूजा होती है वहां लक्ष्मी जी का वास होता है प्रभु को बांसी भोजन या माखन का भोग नहीं लगाना चाहिएए उन्हें ताजा माखन का प्रसाद लगाना चाहिएए संस्कृत में माख यानी क्रोधए ना माने नहींए भगवान कहते हैं कि मुझे क्रोधी व्यक्ति पसंद नहीं हैए जिसका हृदय माखन की तरह है उससे मुझे प्रेम हैय क्रोध तीन प्रकार का होता है रजोगुणए तमोगुणए मैं और मेर से उत्पन्न होता हैए वह क्रोध दूसरों का नुकसान कम करता हैए अपना नुकसान ज्यादा होता हैए भागवत कहती है कि क्रोध में कोई निर्णय ना लोए क्रोध में गलत निर्णय होते हैंए उससे जीवन भर व्यक्ति परेशान रहता है।
रोजाना घर में करें भागवत का पाठ: आचार्य मृदुल
आचार्य महाराज ने श्रीमद भागवत जी का महत्व बताते हुये सीख दी है कि व्यक्ति को रोजाना घर में एक भागवत का पाठ करना चाहिये। भले ही वह एक चरण ही बोलेए श्री गोविंदायः नमो नमः यह दीजिये। भागवत जी में लिखा है कि जो भागवत का एक चरण ही बोलता है उस जीव की परागती ही होगी।
जहां भगवान श्रीकृष्ण की पूजा होती है वहां लक्ष्मी का वास होता है
कृष्ण का अर्थ होता है भगवान। भगवान वह होते है जो अपनी ओर खिंचता है जैसे भगवान का रूपए लीलाए परिपक्ष्य है उसे ही भगवान कृष्ण कहते है। ऐसे में चलते फिरते प्रभु के नाम का जाप करते रहा करोय जिस घर में भगवान श्री कृष्ण की पूजा होती है वहां लक्ष्मी जी का वास होता है प्रभु को बांसी भोजन या माखन का भोग नहीं लगाना चाहिएए उन्हें ताजा माखन का प्रसाद लगाना चाहिएए संस्कृत में माख यानी क्रोधए ना माने नहींए भगवान कहते हैं कि मुझे क्रोधी व्यक्ति पसंद नहीं हैए जिसका हृदय माखन की तरह है उससे मुझे प्रेम हैय क्रोध तीन प्रकार का होता है रजोगुणए तमोगुणए मैं और मेर से उत्पन्न होता हैए वह क्रोध दूसरों का नुकसान कम करता हैए अपना नुकसान ज्यादा होता हैए भागवत कहती है कि क्रोध में कोई निर्णय ना लोए क्रोध में गलत निर्णय होते हैंए उससे जीवन भर व्यक्ति परेशान रहता है।
इन गणमान्य नागरिकों ने किया कथा का रसपान
सर्वश्री कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष नानकराम चंदनानीए पूर्व प्रदेश सचिव कांग्रेस नवीन बजाजए मंडल अध्यक्ष पृथ्वीराज त्रिवेदी, मंडल अध्यक्ष चंद्रप्रकाश ईसरानी, लाईफ लाईन स्कूल प्राचार्य किरन वाधवानी, ओम विद्वया मंदिर स्कूल से मनीष चौबे, श्रृष्टि चौबे, केटी शाहनी स्कूल से विमला हिंगोरानी, संतोष रजक, अनिल मिश्रा, नवयुवक सभा स्कूल से तोलाराम हिमथानी, मयूर चेलानी, मूलचंद विधानी, मनोहरलाल विधानी, माधू चांदवानी, ,लोकूमल आसवानी, संजय अग्रवाल, मोनू भैया, हीरो ज्ञानचंदानी, लोकूमल आसवानी, बलदेवसिंह पटेल, ठाकुर लालवानी, डॉ. जीटी खेमचंदानी, हितेश वाधवानी, निकिता श्रीवास्तव, स्वाती मालवीय, सिमरन आडवाणी,अशोक मीणा, दीपक मीणा, वीरेन्द्र मीणा, एलबी साहू, कमल मनसुखानी, लोकूमल जनियानी एवं संत हिरदाराम नगर मंडल के समस्य पदाधिकारी उपस्थित हुये।
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