अकेले एमपी में 8.8% गरीबी, 4.43 हजार करोड़ रुपए होगें खर्च; क्या सत्ता के लिए है न्यूनतम आय की गारंटी? - Web India Live

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अकेले एमपी में 8.8% गरीबी, 4.43 हजार करोड़ रुपए होगें खर्च; क्या सत्ता के लिए है न्यूनतम आय की गारंटी?


भोपाल. लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल बज गया है। पार्टियां जहां उम्मीदवारों के चयन में कड़ा होमवर्क कर रही हैं वहीं, सत्ता पाने के लिए लोकलुभावने वादे भी किये जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सत्ता में वापसी के लिए सोमवार को एक चुनावी वादा किया है। राहुल गांधी ने देश में न्यूनतम आय गारंटी की योजना लागू करने का वादा किया है। राहुल गांधी का यह वादा कितना प्रभावी होगा इसका फैसला तो जनता को ही करना है।

क्या कहा राहुल गांधी ने
राहुल गांधी ने सोमवार को न्यूनतम आय गारंटी के अपने चुनावी वादे के बारे में विस्तार से बताया। राहुल का दावा है कि प्रति परिवार 12 हजार रुपए महीना देने से 25 करोड़ गरीबों को फायदा होगा। उन्होंने कहा- हम 12 हजार रुपए महीने की न्यूनतम आय सुनिश्चित करेंगे। इससे 25 करोड़ परिवारों को फायदा होगा। राहुल का दावा है कि देश के 20% सबसे गरीब परिवारों को इसका लाभ मिलेगा। सालाना 72 हजार रुपए उनके खाते में ट्रांसफर होंगे।

मध्यप्रदेश में गरीबी का आंकड़ा
यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम और ओपीएचआई की वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक- 2018 की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश में गरीबी का खुलासा किया है। देश का सबसे गरीब जिला मध्यप्रदेश का अलीराजपुर है। वहीं, गरीब राज्यों में मामले में मध्यप्रदेश का देश में चौथा स्थान है।

क्या कहती है रिपोर्ट
यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) और ओपीएचआई की वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक- 2018 की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रिपोर्ट 10 मानकों के आधार पर 2015-16 के डेटा के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट में बिहार को देश का सबसे गरीब राज्य बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार झारखंड व मप्र में 20.6 फीसदी लोग गरीबी की कगार पर खड़े हैं। गरीबी के मामले में मप्र चौथे नंबर पर है। बिहार 17.0 , झारखंड 10.5, उत्तरप्रदेश 9.8 और मध्यप्रदेश में 8.8 फीसदी लोग गरीब हैं।

मध्यप्रदेश की कुल जनसंख्या
2011 की जनगणना के अनुसार, मध्यप्रदेश की कुल जनसंख्या 7 करोड़ से ज्यादा है। यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) और ओपीएचआई की वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक- 2018 की रिपोर्ट को अगर आधार माना जाए तो 7 करोड़ से अधिक आबादी वाले राज्य की करीब 8.8 फीसदी आबादी गरीब है। अगर इसे आधार माना जाए तो मध्यप्रदेश में लगभग 61 लाख 60 हजार लोग गरीबी के दायरे में आते हैं। राहुल गांधी की न्यूनतम गांरटी आय के अनुसार, हर माह गरब को 12 हजार रुपए दिए जाएंगे। इस हिसाब से केवल मध्यप्रदेश में इस गांरटी योजना के तहत लगभग 4.43 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

क्या कहना है अर्थशास्त्रियों का
अर्थशास्त्र के जानकारों का कहना है कि देश की गरीबों की संख्या कुल आबादी का 22 प्रतिशत थी। अगर सरकार 72 हजार रुपए देने की योजना बनाती है तो कोई बड़ी बात नहीं है। इस योजना के माध्यम से पैसे देकर आप इसे आसनी से लागू कर सकते हैं इसे लागू करने में कोई कठिनाई नहीं है। इस गांरटी योजना का एक असर यह भी हो सकता है कि अभी मनरेगा में आने वाले खर्च को बंद किया जा सकता है, लोन के खर्चे कम किए जा सकते हैं दूसरी योजनाओं पर जो सब्सिडी दी जा रही है, वो कम किया जा सकता है। इस योजना को आसानी से लागू किया जा सकता है।

न्यूनतम आय गारंटी का राजनीतिक मतलब?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की यह घोषणा अपने वोटरों को वापस लाने की कोशिश है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बड़ी संख्या में कांग्रेस के वोटर खिसक गए थे। कांग्रेस पहले से ही गरीबी हटाओ का नारा लगाती रही है और गरीब लोगों की वजह से ही कांग्रेस सत्ता में भी इतने सालों तक रही है। अब राहुल गांधी का यह ऐलान चुनावों के लिए है। इस गांरटी योजना को मोदी सरकार की किसान सम्मान निधि योजना का जवाब भी माना जा रहा है। सम्मान निधि योजना के तहत 6 हजार रुपए की सालाना मदद के जरिए अब राहुल गांधी किसान और गरीब जनता को साधने की कोशिश कर रहे हैं। मोदी सरकार ने सम्मान निधि के माध्यम से देश के करीब 15 करोड़ किसानों को साधने की तैयारी की थी राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह योजना केवल मोदी सरकार के योजनाओं का काट निकलने के लिए लागू की गई है।


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