70 सालों से सेक्यूलरिज्म का भार उठा रहा भारत
भोपाल। यंग थिंकर्स फोरम के रीडिंग क्लब में पुस्तक चर्चा का आयोजन रविवार को किया गया। इसमें मारिया विर्थ की पुस्तक थैंक यू इंडिया पर चर्चा करते हुए सुरभि राजपूत ने बताया कि किस तरह एक जर्मन लेखिका भारत की संस्कृति और सभ्यता से मंत्रमुग्ध हो जाती है और यहीं की होकर रह जाती है। 39 देशों की यात्रा कर चुकीं मारिया इस पुस्तक में बताती हैं कि क्यों वह हिन्दू संस्कृति और सभ्यता से प्रभावित हुईं।
वे इस किताब की शुरुआत श्री गणेशाय नम: से करती हैं और भारत के संतों और विचारकों के साथ अपने अनुभवों का वर्णन करती हैं। इस पुस्तक में मारिया ने भारत की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर भी टिप्पणी की हंै। मारिया भारत में अंग्रेजी शिक्षा के नुकसान के साथ-साथ हिन्दू आतंकवाद और राहुल गांधी के बयानों पर भी टिप्पणी करती हैं।
सेक्युलरिज्म के जाल में फंसला भारत
संदीप बालकृष्ण की किताब '70 इयर्स ऑफ सेकुलरिज्म' पर चर्चा करते हुए अंकित कुमार बताते हैं कि किस तरह देश में सेक्युलरिज्म की परिभाषा गढऩे की कोशिश हो रही है। इस किताब में उन लेखों का संकलन किया गया है जिनके विचारों को संगठित तरीके से जनता के सामने नहीं आने दिया गया।
संदीप इस किताब में वर्तमान भारतीय व्यवस्था की चर्चा करते हुए बताते हैं कि स्वतंत्रता के बात तत्कालीन सरकारों ने भारतीय नीतियों और विचारों की जगह विदेशी विचारों को ज्यादा महत्व दिया। इस पुस्तक में एलोरा की गुफाओं और महाभारत से लेकर जवाहरलाल नेहरू विवि का वर्णन करते हुए बताया गया है कि किस तरह संगठित तरीके से भारतीय विचारों को गलत रूप में प्रस्तुत करके दूषित करने का प्रयास किया जा रहा है और कम्युनिज्म की विचारधारा इस देश को कमजोर बना रही है।
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