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शताब्दी में खाने की क्वालिटी खराब, सूप पतला पानी, नॉनवेज से अंडा गायब

भोपाल/ सरकार फस्र्ट क्लास ट्रेनों सहित अन्य ट्रेनों में आगामी मार्च से खाना, चाय, नाश्ते के रेट बढ़ाने की तैयारी में है, लेकिन मौजूदा स्थिति में ट्रेनों में जो खाना परोसा जा रहा है उसकी क्वालिटी सुधार को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

नई दिल्ली भोपाल शताब्दी की बात करें तो दिल्ली से चलने के बाद हबीबगंज पहुंचते-पहुंचते इस ट्रेन की प्रतिदिन 6 से 7 शिकायतें होती हैं। लेकिन ट्विटर पर की गई शिकायत को ही दर्ज किया जाता है। कई बार तो इन शिकायतों को भी गायब कर दिया जाता है। पिछले डेढ़ माह में शिकायतों की संख्या 110 के आस-पास है। लेकिन दर्ज नाममात्र ही होती हैं, जिनमें तत्काल एक्सन लिया जाता है।

देश की प्रीमियम ट्रेनों के ये हालात हैं और ऐसे में सरकार खाने की क्वालिटी पर ध्यान न देकर सिर्फ रेट बढ़ाने पर जोर दे रही है। खाने के अलावा कोच में कूलिंग कम होने, साफ सफाई, सीट खराब होने की शिकायत भी इस ट्रेन में आम है। टिवटर पर की गई शिकायतों के अनुसार ही ट्रेन में परोसे जाने वाली सब्जी की क्वालिटी खराब होने की शिकायत ज्यादा रहती है। कभी रोटियां कच्ची रह जाती हैं। सूप पतला देने की शिकायत और नॉनवेज खाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई ये शिकायतें रहती हैं।

कोच में शिकायत होने के बाद अटेंडर सब्जी या रोटी को तुरंत बदल देता है, लेकिन ट्विटर पर की गई शिकायत के संबंध में इन्हें जवाब देना होता है। नियमानुसार इस लापरवाही पर रेलवे को कैटरिंग चलाने वाली एजेंसी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है, लेकिन ट्विटर पर की गई शिकायत में 500 से लेकर 5000 तक जुर्माना लगाया जाता है वो भी कभी-कभी। कोच में चलने वाले अटेंडर भी कभी-कभी यात्रियों के साथ अभद्रता कर देते हैं। इसकी शिकायत भी कम ही दर्ज की जाती हैं। जबकि इस ट्रेन में उन्हीं अटेंडर को रखना चाहिए जो पहले से टे्रनिंग लिए हुए हैं।

पहले गुणवत्ता सुधारें फिर बढ़ाएं रेट

मंडल रेल उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य निरंजन वाधवानी का कहना है कि डीआरएम के साथ होने वाली हर बैठक में शताब्दी खाने की क्वालिटी को लेकर चर्चा की जाती है, लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा। ग्वालियर बेस किचन से शताब्दी का खाना चढ़ता है। वहां कुछ दिन पहले छापे में गंदगी मिली है। ऐसी स्थिति में खाने की स्थिति में सुधार हो नहीं सकता। इस ट्रेन में उच्च श्रेणी के सफर यात्री सफर करते हैं, अगर यही स्थिति रहेगी तो क्वालिटी कैसे कंट्रोल होगा। इसके लिए रेलवे को भारी भरकम जुर्माना होगा। इसके बाद ही कैटरिंग व्यवस्था में सुधार होगा।

स्पिं्रग टूटने, इंजन में खराबी की शिकायतें भी


शताब्दी टे्रन के कोच काफी पुराने हो चुके हैं, ऐसे में इस ट्रेन के कोचों की स्प्रिंग टूटने और कभी-कभी इंजन खराब होने के कारण यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। सोमवार को ही सी-11 कोच की स्प्रिंट टूटने के कारण ट्रेन अपने निर्धारित समय से 40 मिनट की देरी से रवाना हो सकी थी। यात्रियों को परेशानी हुई, कई बुजुर्ग यात्रियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।

शताब्दी में खाने के संबंध में जो भी शिकायतें होती हैं वो आईआरसीटीसी को फॉरवर्ड की जाती हैं। हमारी कोशिश रहती है कि खाने की शिकायत पर कड़ा एक्शन लें और लेते हैं। शिकायतें टिवटर तो कभी फोन पर भी प्राप्त होती हैं।
- अनुराग पटेरिया, सीनियर डीसीएम भोपाल रेल मंडल



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