भाजपा सरकार में हुआ फर्जी भुगतान, कांग्रेस सरकार कराएगी जांच
भोपाल. कांग्रेस सरकार ने पिछली भाजपा सरकार के समय तालाब और कुओं के निर्माण में हुए घोटालों की जांच की तैयारी कर ली है। इसमें आदिवासी इलाकों से लेकर पिछड़े इलाकों तक में जमकर गड़बडिय़ां हुई थी। इन पुराने मामलों की स्क्रूटनी शुरू की जा रही है।
पिछली सरकार के समय आदिवासी और पिछड़े इलाकों में तालाब बनाने के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान लिया गया था। लेकिन, तालाब खुदाई व निर्माण नहीं किया गया। कुओं के गहरीकरण और पुरानी जल संरचनाओं की मरम्मत के नाम पर भी लाखों रुपए के भुगतान हुए थे। वर्ष 2013 से 2016 के बीच जो मामले सामने आए उनकी स्क्रूटनी की जानी है। इसमें बड़वानी जिले में फर्जी तरीके से तालाब निर्माण का मामला भी शामिल हैं। पिछली सरकार ने बड़वानी की गड़बड़ी सामने आने के बाद भोपाल से टीम बनाकर सभी जिलों में जांच कराई थी। उसमें भारी गड़बडिय़ां मिली थीं। लेकिन, जांच को केवल बड़वानी तक सीमित रखा गया था। जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया था। ऐसे सभी मामले अब सामने लाए जा सकते हैं।
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पिछली सरकार के समय आदिवासी और पिछड़े इलाकों में तालाब बनाने के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान लिया गया था। लेकिन, तालाब खुदाई व निर्माण नहीं किया गया। कुओं के गहरीकरण और पुरानी जल संरचनाओं की मरम्मत के नाम पर भी लाखों रुपए के भुगतान हुए थे। वर्ष 2013 से 2016 के बीच जो मामले सामने आए उनकी स्क्रूटनी की जानी है। इसमें बड़वानी जिले में फर्जी तरीके से तालाब निर्माण का मामला भी शामिल हैं। पिछली सरकार ने बड़वानी की गड़बड़ी सामने आने के बाद भोपाल से टीम बनाकर सभी जिलों में जांच कराई थी। उसमें भारी गड़बडिय़ां मिली थीं। लेकिन, जांच को केवल बड़वानी तक सीमित रखा गया था। जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया था। ऐसे सभी मामले अब सामने लाए जा सकते हैं।
- गलत मदों में बेहिसाब खर्च
ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में जल संरचनाओं के लिए बेहिसाब खर्च किया गया। ग्रामीण विकास के तहत मनरेगा व अन्य मदों में तालाबों के लिए जमकर खर्च किया गया। वहीं, आदिवासी अंचलों में आदिवासी उपयोजना के पैसे को खर्च किया था। अब आदिवासी उपयोजना के तहत खर्च सभी प्रकार के बजट की रिपोर्ट बुलाई गई है। कई जगह गलत मदों में राशि खर्च कर दी गई। इसकी रिपोर्ट मांगी तो जिलों ने नहीं दी। इन सभी गड़बडिय़ों की जांच राज्य मुख्यालय से टीम बनाकर कराई जा सकती है।
ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में जल संरचनाओं के लिए बेहिसाब खर्च किया गया। ग्रामीण विकास के तहत मनरेगा व अन्य मदों में तालाबों के लिए जमकर खर्च किया गया। वहीं, आदिवासी अंचलों में आदिवासी उपयोजना के पैसे को खर्च किया था। अब आदिवासी उपयोजना के तहत खर्च सभी प्रकार के बजट की रिपोर्ट बुलाई गई है। कई जगह गलत मदों में राशि खर्च कर दी गई। इसकी रिपोर्ट मांगी तो जिलों ने नहीं दी। इन सभी गड़बडिय़ों की जांच राज्य मुख्यालय से टीम बनाकर कराई जा सकती है।
- ऑडिट ऐतराज व उपयोगिता प्रमाण-पत्र
इन मामलों में खर्च की उपयोगिता को लेकर पूर्व सरकार ने ऑडिट आपत्तियों को भी दरकिनार कर दिया था। अब कमलनाथ सरकार के समय ये ऑडिट आपत्तियां उठी, तो इस ओर ध्यान गया है। इसमें अधिकतर जिलों से कामों के उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं मिल पाए। इसके बाद इन मामलों को लेकर स्क्रूटनी की तैयारी है।
इन मामलों में खर्च की उपयोगिता को लेकर पूर्व सरकार ने ऑडिट आपत्तियों को भी दरकिनार कर दिया था। अब कमलनाथ सरकार के समय ये ऑडिट आपत्तियां उठी, तो इस ओर ध्यान गया है। इसमें अधिकतर जिलों से कामों के उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं मिल पाए। इसके बाद इन मामलों को लेकर स्क्रूटनी की तैयारी है।
आदिवासी उपयोजना के खर्च का पूरा हिसाब मांगा है। कहां किस मद में राशि खर्च हुई उसकी जानकारी मांगी है। जानकारी आ जाए, फिर जहां गड़बड़ी है वहां जांच बैठाएंगे।
- ओंकार सिंह मरकाम, मंत्री, आदिम जाति कल्याण
[MORE_ADVERTISE2]- ओंकार सिंह मरकाम, मंत्री, आदिम जाति कल्याण
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