हमीदिया से रेमडेसिविर चोरी मामले में मानवाधिकार आयोग ने पीएस स्वास्थ्य से मांगा जवाब - Web India Live

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हमीदिया से रेमडेसिविर चोरी मामले में मानवाधिकार आयोग ने पीएस स्वास्थ्य से मांगा जवाब

भोपाल। मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग ने हमीदिया अस्पताल से चोरी हुए 863 रेमडेसिविर इंजेक्शन के संबंध में की गई शिकायत पर संज्ञान लिया है। आयोग ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से एक माह में प्रतिवेदन मांगा है। इस संबंध में कांग्रेस प्रवक्ता अमिताभ अग्निहोत्री ने शिकायत की थी। इसमें हमीदिया अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों के मानवाधिकार हनन की जांच की मांग की गई थी। अग्निहोत्री ने बताया कि रेमडेसिविर चोरी के मामले में 70 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे ऐसा लग रहा है कि रसूखदारों के दबाव में इस केस को दबाया जा रहा है। जबकि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान रेमडेसिविर चोरी होने के कारण कई मरीजों को समय पर जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं लग पाए। इससे उनके स्वास्थ्य संबंधी मानवाधिकार का हनन हुआ है। प्रदेश में इंजेक्शन कालाबाजारी के मामलों में अभी तक कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है कई लोगों पर रासुका लगाई गई है। लेकिन इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

यह है मामला

गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल से संबद्ध हमीदिया अस्पताल के सेंट्रल ड्रग स्टोर से 10 अप्रैल से 16 अप्रैल तक कोविड सेंटर की मांग पर 548 रेमडेसिविर इंजेक्शन भेजे गए, लेकिन कोविड सेंटर को 458 इंजेक्शन ही मिले। जबकि नर्सिंग स्टाफ ने रिकॉर्ड में स्टोर से 850 इंजेक्शन भेजे जाने की बात कही है। ऐसे में हमीदिया अस्पताल के सेंटर ड्रग स्टोर और डी ब्लॉक के कोविड सेंटर के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। सेंट्रल ड्रग स्टोर से 863 इंजेक्शन चोरी होने पर 17 अप्रैल को एफआइआर दर्ज हुई थी। क्राइम ब्रांच की जांच में इस बात का भी पता चला था कि जिस नंबर सीरीज के इंजेक्शन चोरी हुए थे, उसके छह इंजेक्शन दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कोविड पेशेंट को लग चुके हैं। इस मामले में हमीदिया अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ आइडी चौरसिया और सेंट्रल ड्रग स्टोर प्रभारी डॉ. संजीव जयंत को हटाया गया था। संजीव जयंत के साथ तीन कर्मचारी आरपी कैथल, तुलसीराम पाटनकर और अलकेंद्र दुबे को भी हटाया गया था। पूर्व अधीक्षक डॉ. चौरसिया समेत 35 कर्मचारियों से पूछताछ की गई थी लेकिन, पूछताछ में इंजेक्शन चोरी का सुराग हाथ नहीं लगा।



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