अपने घर का सपना टूटा, बिल्डर ने मकान बुक कराने वालों के साथ किया धोखा
छिंदवाड़ा. जिले की मनीषा श्रीवास्तव ने आकृति ग्रुप में वर्ष 2011 में माकान बुक किया था। 2014 तक इस ग्रुप को 36 लाख 66 हजार रुपए से अधिक राशि दे चुकी हैं, क्योंकि आकृति ने उन्हें इस समयावधि में मकान देने का वादा किया था। वो भोपाल में 17 हजार रुपए प्रति माह के हिसाब से मकान किराया पर लेकर अपने परिवार के साथ रहती हैं। आकृति गु्रप इन्हें आज दिनांक तक माकान नहीं दिया है।
भोपाल में आकृति ग्रुप ने मकान बुक कराने वालों के साथ अनुबंध करने से लेकर पजेशन देने तक धोखा देता जा रहा है। अनुबंध में तय समय पर राशि नहीं देने पर माकान लेने वालों से 24 प्रतिशत ब्याज दर से राशि वसूलने का प्रावधान किया है, लेकिन जब वह खुद मकान देने में देरी करेगा तो खरीददार को उसके बदले में क्या मिलेगा, इसका अनुबंध में कोई प्रावधान नहीं करता है। इसी का फायदा उठाते हुए लोगों को अपने कार्यालय के चक्कर लगवाता है। रेरा से भी लोगों को इस मामले में बहुत ज्यादा राहत अभी तक नहीं मिल पाई है।
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लोगों ने बैंक और साहूकारों से 9-15 फीसदी ब्याज दर पर कर्ज लेकर आकृति ग्रुप को पूरी राशि दी, लेकिन प्रोजेक्ट तीन से पांच साल तक लेट होने के कारण उन्हें मकान की किस्त भारी पड़ रही है। रेरा ने बिल्डर के पास जमा राशि का सिर्फ 6 फीसदी ब्याज दर माकान बुक कराने वालों को देने के लिए फैसला किया है। हालांकि रेरा के फैसले के बाद भी मकान बुक कराने वालों को ब्याज की राशि नहीं मिल पा रही है।
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होशंगाबाद के इटारसी की रहने वाली ऊषा साहू ने 2013 में आकृति में साढ़े 29लाख रुपए से अधिक राशि देकर माकान बुक किया था। आकृति गु्रप ने उन्हें 36 माह के अंदर माकान देने का झांसा देकर 90 फीसदी राशि पहले ही ले लिया था। शर्तों के अनुसार उन्हें मकान वर्ष 2018 में बनाकर दे देना था, लेकिन अभी तक माकान नहीं दिया है।
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विवादित जमीन पर काटे प्लाट
आकृति ग्रुप ने कई प्लाट विवादित जमीन पर काट दिए। इन प्लाटों को भी बुक कर दिया। जिसके चलते माकान बुक कराने वालों को दिक्कतें हो रही हैं। क्योंकि जब तक विवादित जमीन का निराकरण नहीं होता है तब तक प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाता है। इसके चलते लोगों को जहां ३६ माह के अंदर माकान मिल जाना चाहिए था, वहां ६० माह में भी माकान नहीं मिल पा रहा है।
कोरोना की आड़ में बचने की कोशिश
आकृति ग्रुप अब कोरोना को अपनी ढाल बनाने में लगा है। रेरा से यह कह रहा है कि कोरोना के चलते न तो मजदूर मिल पा रहे हैं और न ही मटेरियल आ पा रहा है। इसके चलते प्रोजेक्ट लेट हो रहा है, जैसे ही मजदूर वापस आ जाएंगे वैसे ही काम शुरू कर दिया जाएगा। कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिन्हेंं कोरोना काल से पहले पूर करना था, उनमें भी कोरोना संक्रमण के चलते काम प्रभावित होना इस ग्रुप ने रेरा को बताया है।
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