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ऑनलाइन अपराध के दलदल में फंसे मासूम पुलिस भी हैरान

भोपाल. कोरोना वायरस एवं संक्रमण से बच्चों को बचाने के लिए करीब दो साल से ऑनलाइन क्लास संचालित हो रही हैं। बच्चे कोरोना से तो सुरक्षित रहे, लेकिन इंटरनेट और मोबाइल के उपयोग से उनके साइबर क्राइम का शिकार होने का खतरा बढ़ गया है। उत्सुकता के चलते बच्चे कई बार प्रतिबंधित वेबसाइट का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। जाने-अनजाने में शिकार बन जाते हैं।

साइबर थाना भोपाल में ऐसे एक दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें छोटे बच्चे जाने अनजाने में इस दलदल में फंस गए। कई बच्चे ऑनलाइन गेम की लत के चलते चोरी तक करने लगते है। दोस्तों से उधार लेकर गेम खेलते है। केंद्र एवं राज्य सरकार ने बच्चों को इस तरह के अपराध से बचने के लिए गाइडलाइन जारी कर माता-पिता को आगाह किया है। बच्चों को ऑनलाइन अपराध से बचाने के लिए माता-पिता किसी अच्छे सॉफ्टवेयर की मदद से उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। जरूरी यह है कि बच्चों को ऑनलाइन अपराध के बरे में शिक्षित किया जाए।

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पुलिस भी हैरान
- पिछले 2 साल में नाबालिगों से जुड़े ऑनलाइन 38 प्रकरण दर्ज हुए
- पिछले 2 साल में नाबालिक गंभीर साइबर अपराध के 08 प्रकरण दर्ज हुए
- अपराधी प्रकरणों में अब तक 3 नाबालिगों को सजा मिली है
- 05 प्रकरण एसे जो दूसरे राज्यों से जुड़े

बच्चों को ऑनलाइन व्यवहार सिखाएं

पूर्व एडीजी शैलेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि छोटी कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा में पढ़ने वाला बच्चा भी अपराध और उससे मिलने वाली सजा से भयभीत रहता है। माता-पिता यदि अपने बच्चे को ऑनलाइन व्यवहार के बारे में शिक्षित करेंगे तो बच्चे इंटरनेट का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक करेंगे एवं इसका इस्तेमाल 7 सकारात्मक चीजों के लिए हो पाएगा। बच्चे नासमझी में ऐसी गतिविधियां करने लगते हैं, जिसके चलते उन्हें लिए सामाजिक जीवन में निंदा का सामना करना पड़ता है। समाज का यह कर्तव्य है कि भविष्य की चुनौतियों से लड़ने के लिए बच्चों को तैयार किया जाए एवं उन्हें ऑनलाइन व्यवहार सिखाया जाए।

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माता-पिता बरतें सावधानी
- बच्चों द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरणों पर पेरेंटल कंट्रोल सॉफ्टवेयर के साथ एंटी वायरस सॉफ्टवेयर लगाएं और उनके द्वारा देखी जाना वाली सोशल साइटों पर नजर रखें।

- बच्चों से गूमिंग, बुलिंग और स्टैकिंग जैसे संभावित ऑनलाइन खतरों के बारे में बातचीत करें। इंटरनेट और ऑनलाइन गेम के उपयोग के संबंध में स्पष्ट दिशा निर्देश सेट करें।

- यदि आपका बच्चा ऑनलाइन अधिक समय बिताना शुरू कर देता है और अपनी गतिविधियों के बारे में डिफिन्सिव या सीक्रेटिव होने लगता है, तो यह साइबर गूमिंग का एक संकेत हो सकता है। बच्चे से बातचीत करें और उसे अन्य गतिविधियों में लगाएं।

- ग्रूमिंग एक ऐसी प्रणाली है जिससे कोई व्यक्ति यौन शोषण के लिए किसी बच्चे का विश्वास प्राप्त करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया या चैट विंडो के माध्यम से उसके साथ एक भावनात्मक संबंध बनाता है।

- यदि एक वेब कैमरा हैक या कम्प्रोमाइज्ड हो जाए तो इसका दुरुपयोग होता है, इसलिए जब वेबकैम का उपयोग नहीं हो तब वेबकेम को कवर करके रखें।

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एडीजी एवं आईजी भोपाल रेंज, ए साईं मनोहर ने कहा कि ऑनलाइन खिलाए जाने वाले गेम लत की तरह बच्चों में विकृति पैदा कर रहे हैं। इससे कई प्रकार के अपराध जन्म ले रहे हैं। बच्चों को साइबर क्राइम से बचाने के लिए माता-पिता इस तरह की गतिविधियों से दूर रखें।

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