बिना सीमेंट, लोहे के भुज के पत्थरों से बन रहा जिनालय, धार्मिक और पर्यटन के आकर्षण का रहेगा केंद्र
- 2023 में मंदिर का निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य
- साढ़े 21 हजार वर्गफीट में ले रहा आकार
- शिखर तक कुल 179 फीट होगी ऊंचाई
- 80 करोड़ रुपए से अधिक की राशि होगी खर्च
भोपाल
राजधानी के हबीबगंज जैन मंदिर प्रांगण में पंचबालयति सहस्त्रकू ट जिनालय का निर्माण किया जा रहा है। यह मंदिर आचार्य विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद से बनाया जा रहा है। मंदिर निर्माण का प्रथम तल का कार्य पूरा हो गया। इस मौके पर मंदिर में हर्षोल्लास के श्रद्धालुओं ने शिलाएं स्थापित की, आचार्यश्री के जयकारे लगाए और शिलाएं और बीम को स्पर्श कर स्थापित किया।
इस मौके पर मुनि संभव सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में भगवान आदिनाथ का अभिषेक किया और मंत्रोच्चारित शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और प्रथम तल का निर्माण होने पर खुशी का इजहार किया। दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रमोद जैन हिमांशु ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 2016 में प्रारंभ हुआ था। कोरोना संक्रमण के कुछ महीने काम रूका भी रहा, लेकिन इसका प्रथम तल बनकर तैयार हो गया है। हमारा लक्ष्य है कि 2023 तक इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो जाए।
गुलाबी पत्थरों और नागर शैली की कलाकृति
इस मंदिर निर्माण की खासियत यह है कि इस सहस्त्रकुट पंचबालयति जिनालय के निर्माण में सीमेंट और लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि यह मंदिर भुज गुजरात के गुलाबी पत्थरों से तैयार किया जा रहा है। इसमें पुरातत्व नागर शैली की झलक दिखाई देगी, जो श्रद्धालुओं का मन मोह लेगी। धार्मिक तीर्थ के साथ साथ यह पर्यटन की दृष्टि से भी लोगों को आकर्षिक करेगा।
भारतीय संस्कृति के माथे का तिलक होते हैं जिनालय
इस मौके पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन के दौरान मुनि संभव सागर महाराज ने कहा कि जिनालय और देवालय भारतीय संस्कृति के माथे का तिलक होते हैं। आने वाले समय में युवा पीढ़ी को हमारी भारतीय सांस्कृतिक संपदा की विरासत की भव्यता को बताएंगे। मुनिश्री निष्पक्ष सागर महाराज ने कहा कि हमारी अहिंसा की नींव पर जिनालयों का निर्माण होता है। राग और द्वेष में साम्यभाव रखना ही अहिंसा है, मन निर्मल होता है तो कर्म भी वैसे होते हैं और दोनों का परिणाम क्षमा के रूप में होता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के गुणों की वंदना की। चातुर्मास समिति के कार्य अध्यक्ष मनोज बांगा ने बताया कि मुख्य शिलायें और बीम को स्थापित करने का सौभाग्य पुण्र्याजक परिवारों को प्राप्त हुआ। इसके पूर्व सुबह हबीबगंज जिनालय में मुनिसंघ की अगवानी की गई।
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