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क्यों 14 नहीं, 15 जनवरी को मनाई जाती है मकर संक्रांति ? ये है बड़ा कारण

भोपाल। उत्तरायण सूर्य की आराधना का पर्व मकर संक्रांति आज श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। इस मौके पर श्रद्धालु भगवान सूर्यदेव की आराधना कर रहे। घरों और मंदिरों में तिल गुड़ के पकवानों का भगवान को भोग लगाया जाएगा। इस बार अपने स्वरूप के चलते मकर संक्रांति विशेष फलदायी होगी। इसके प्रभाव के कारण किसान, व्यापारी, विद्यार्थियों के लिए मकर संक्रांति विशेष शुभकारी होगी। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सुबह 9:24 मिनट पर हो चुका है, इसी के साथ पुण्यकाल शुरू हो गया , जो शाम को 5:24 मिनट तक रहेगा।

पिछले कुछ सालों से संक्रांति स्नान 15 जनवरी को ही मनाया जा रहा है। इस बार भी यह लगातार तीसरा वर्ष है, जब संक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिष मठ संस्थान के पं. विनोद गौतम ने बताया कि मकर संक्रांति पर्वकाल में हर 80 से 100 साल में लगभग 24 घंटे का अंतर आता है। यानी हर 20 से 25 साल में यह अंतर छह घंटे का होता है। 1900 से 2000 के बीच मकर संक्रांति का पर्व अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 14 जनवरी को मनाया जाता था।

इस बीच 1933, 1938 सहित कई साल ऐसे भी रहे जब सूर्य का प्रवेश 13 जनवरी को हुआ और उसी दिन पर्व मनाया, जबकि 2000 के बाद पिछले आठ दस सालों से लगातार मकर संक्रांति का आगमन 14 की रात्रि में होता है और 15 जनवरी को पर्वकाल मनाया जाता है।

-1933, 1938 सहित कुछ साल 13 जनवरी को पड़ा था
-पर्वकाल 1900 से 2000 तक 13 और 14 को मनाई जाती थी मकर संक्रांति, पिछले चारपां च सालों से 14 व 15 को पडऩे लगा पर्व
-अब आगे अधिकांश समय 15 को मनेगा पर्वकाल

पहले कब थी संक्रांति

2023 - 15 जनवरी
2022 - 15 जनवरी
2021 - 14 जनवरी
2020 - 15 जनवरी
2019 - 15 जनवरी
2018 - 14 जनवरी
2017 - 14 जनवरी



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