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गर्भगृह में 30 फीट दूर से होंगे रामलला के दर्शन

BHOPAL मभक्तों की 500 सालों की प्रतीक्षा खत्म हुई। लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या के राम मंदिर में रमलला विराजमान होने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक दिन को लेकर हर कोई उत्साह में है। सभी ने अपने-अपने तरीके से राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां की हैं।

भगवान राम का मंदिर परंपरागत नागर शैली में करीब ढाई एकड़ में बन रहा है। जबकि, परिक्रमा पथ के साथ पूरा परिसर का क्षेत्रफल करीब आठ एकड़ होगा। तीन मंजिला मंदिर की ऊंचाई 162 फीट होगी। ग्राउंड फ्लोर के गर्भ गृह में श्रीराम बाल स्वरूप में विराजित किए जा रहे हैं। प्रथम तल के गर्भ गृह में राम दरबार होगा। जबकि मंदिर में कुल 392 पिलर होंगे। गर्भगृह में 160 और ऊपरी तल में 132 खंभे बनेंगे। मंदिर में नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप के साथ पांच मंडप होंगे। गर्भगृह में 30 फीट दूर से रामलला के दर्शन होंगे।
प्रभु श्रीराम का सिंहासन
राम लला जिस सिंहासन पर विराजमान होंगे, वह संगमरमर का बना है। इस पर सोना मढ़ा है। जबकि रामलला का मुकुट और अन्य जेवरात सोने के हैं। एक किलो की चरण पादुकाएं भी सोने की हैं।
7.5 किलो की चांदी की थाल से पहला भोग
जयपुर में बनी चांदी के विशेष थाल से रामलला का पहला भोग लगाया जाएगा। इस थाली को 7.5 किलो चांदी से तैयार किया गया है। इस थाल को चांदी की शिला पर हनुमानजी हाथों पर उठाए हुए। इसे जयपुर के राजीव पाबूवाल और लक्ष्य पाबूवाल ने तैयार किया है। इसे रामायण और रामचरित मानस के अध्ययन के बाद बनाया गया। करीब पचास लोगों की टीम ने दो माह में इस थाली को तैयार किया।
श्रीराम का प्रसाद
दुनिया के सबसे अलौकिक राममंदिर में मिलने वाला प्रसाद भी दिव्य और अनूठा होगा। इसका स्वाद ऐसा होगा इसे जो एक बार चखे, बार-बार सिर-माथे लगाए। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ऐसा प्रसाद वितरित करेगा जो कई दिनों तक खराब नहीं होगा। मंदिर के प्रसाद का अपना ब्रांड होगा। अभी भक्तों को प्रसाद के रूप में मेवा के लड्डू और पेड़ा दिया जाएगा। यह अन्य देवालयों से अलग और खास होगा। इसमें सिर्फ मिठास ही नहीं, बल्कि भक्ति का अहसास भी होगा।
दरवाजों पर सोने की परत
राम मंदिर में कुल 36 दरवाजे लगाए जाएंगे। 18 दरवाजे गर्भ गृह के होंगे। इन्हें सागौन की लकड़ी से बनाया गया है। इनके ऊपर सोना जड़ा गया है। हर दरवाजे पर करीब 3 किलो सोने की परत चढ़ी है।
रामलला के चेहरे को निखारेंगी सूर्य किरणें
राममंदिर में बनाए गए विशिष्ट प्रकार के झरोखे से सूरज की किरणें सीधे छनकर रामलला के मुखड़े पर पड़ेंगी। यह ऑप्टो मैकेनिकल सिस्टम के जरिए संभव हो सका है। हर साल रामनवमी पर मंदिर में राममूर्ति के माथे पर सूर्य की किरण सीधे पहुंचेंगी। रामनवमी पर जब रामलला का प्राकट्योत्सव मनाया जा रहा होगा, उसी क्षण सूर्य की किरणें भगवान का अभिषेक करेंगी। ऑप्टो मैकेनिकल सिस्टम में लेंस, दर्पण और माइक्रो कंट्रोलर का उपयोग होता है जिसमें सूर्य की बदलती स्थिति के साथ तालमेल बिठाया जाता है।
परकोटे पर मानस के 100 प्रसंग
राममंदिर निर्माण में प्राचीन विधा के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। राममंदिर के 800 मीटर लंबे परकोटे में भगवान रामलला व रामचरित मानस के 100 प्रसंग उकेरे जा रहे हैं। यह प्रसंग पत्थरों पर बन रहे हैं। एक पत्थर का आकार 6 फीट लंबा, पांच फीट ऊंचा व 2.5 फीट चौड़ा है।
15 किमी तक सुनाई देगी घंटे की गूंज
मंदिर में लगा 2100 किलोग्राम का है । इसे अष्टधातु यानी सोना, चांदी, कॉपर, जिंक, लेड, टिन, आयरन और मरकरी से तैयार किया गया है। इसमें सालों तक जंग नहीं लगेगा। घंटे की आवाज 15 किलोमीटर तक सुनाई देगी।
बिना लोहे और स्टील के बन रहा मंदिर
राम मंदिर ऐतिहासिक आर्किटेक्चर और विज्ञान का अद्भुत मेल है। भारतीय वैज्ञानिकों ने इसे एक आइकॉनिक स्ट्रक्चर बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। मंदिर की डिजाइन को नागर शैली के मुताबिक तैयार किया गया है। इसे चंद्रकांत सोमपुरा ने उत्तर भारतीय मंदिर के डिजाइन के हिसाब से तैयार किया है। मंदिर में किसी आयरन या स्टील का इस्तेमाल नहीं किया गया है क्योंकि आयरन केवल 80 से 90 साल तक ही टिक पाता है। मंदिर में सबसे अच्छी गुणवत्ता के ग्रेनाइट, सैंडस्टोन और मार्बल का इस्तेमाल किया गया है। जॉइंट्स में सीमेंट या लाइम मोर्टर नहीं बल्कि पूरे ढांचे के निर्माण में ग्रोव्स और रिजिज का इस्तेमाल किया गया है। तीसरी मंजिल के ढांचे को इस तरीके से बनाया गया है कि वह 2,500 साल तक टिका रहे।
जन्मभूमि पथ पर एक साथ चल सकेंगे एक लाख श्रद्धालु
रामलला के भक्तों के लिए सुग्रीव किला से रामजन्मभूमि तक बने दर्शन मार्ग जन्मभूमि पथ की चौड़ाई की 80 फीटहै। इस पर एक साथ एक लाख भक्त चल सकेंगे। इस पथ पर चलने वालों को धार्मिकता और आध्यात्मिकता का अहसास होगा। भव्यता बढ़ाने के लिए पूरे रामजन्मभूमि पथ की दीवारों पर धार्मिक चित्रांकन किया जा रहा है। पर्यावरण को संरक्षित करने के संदेश समेत इस पथ पर दोनों तरफ अधिक से अधिक हरियाली होगी। इसी मार्ग पर बन रहे तीर्थ यात्री केंद्र में एक साथ 25 हजार भक्त ठहर सकेंगे। उनके सामान रखने की व्यवस्था होगी।

दो साल में बनकर तैयार होगा पूरा मंदिर
मंदिर को पूरी तरह से बनकर तैयार होने में करीब दो साल और लगेंगे। मंदिर परिसर में चारों ओर सूर्य, भगवती, गणेश और शंकर के मंदिर बनेंगे। उत्तर दिशा में मां अन्नपूर्णा, दक्षिण में बजरंगबली का मंदिर होगा। इसके अलावा महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त, निषाद राज, माता शबरी और देवी अहिल्या का मंदिर होगा। औरजटायु की मूर्ति लगेगी।
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